स्मृति ही अभिलेखागार
वेंकप्पा अंबाजी सुगतेकर मौखिक परंपरा की उस दुनिया के प्रतिनिधि हैं जहाँ किताब से ज़्यादा स्मृति अभिलेखागार का काम करती है। आधिकारिक पद्म प्रशस्ति के अनुसार उनका जन्म 1 मई 1943 को हुआ और वे 10 वर्ष की उम्र से गोंधळी लोकसंगीत और कथा-वाचन प्रस्तुत कर रहे हैं।
सात दशकों से अधिक के अभ्यास में उन्होंने दासर पद, संत शिशुनाळर पद, वचन साहित्य और देवी पद जैसी विविध गीत-परंपराओं को जीवित रखा।
एक मन में पूरा पुस्तकालय
उनकी असाधारण शक्ति स्मृति है। प्रशस्ति के अनुसार वे 1,000 से अधिक गीत और लगभग 150 लंबी पौराणिक कथाएँ कंठस्थ रखते हैं। ऐसी महारत केवल प्रदर्शन नहीं, एक जीवित अभिलेखागार है, क्योंकि कई लोक-शैलियाँ लिखित स्वरलिपि के बजाय गुरु, परिवार और समुदाय की स्मृति से आगे बढ़ती हैं।
उन्होंने ग्रामीण और शहरी, दोनों श्रोताओं के बीच गोंधळी परंपरा प्रस्तुत की, और प्रशस्ति 1,000 से अधिक विद्यार्थियों को मुफ़्त प्रशिक्षण देने का उल्लेख करती है।
आगे सौंपी गई मशाल
2024 में मन की बात के 110वें एपिसोड में प्रधानमंत्री ने उनके प्रयासों का उल्लेख किया। राज्योत्सव पुरस्कार, जानपदश्री, वरिष्ठ नागरिक सम्मान और मानद डॉक्टरेट जैसे सम्मान उनकी लंबी सांस्कृतिक सेवा के पड़ाव हैं। 2025 के पद्म श्री ने इस ज़मीनी मौखिक परंपरा को राष्ट्रीय मंच दिया।
स्रोत
- पद्म पुरस्कार 2025: आधिकारिक प्रशस्ति
- PIB: पद्म श्री अलंकरण, 27 मई 2025
- TV9 कन्नड़: परिचय
- padmaawards.gov.in/Document/pdf/CitationsForTickets/2025/2025135.pdf
- pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2131796
- tv9kannada.com/karnataka/bagalkot/know-a-little-about-bagalkote-venkappa-ambaji-sugatekar-whom-narendra-modi-admired-krn-788302.html