ख़ुद से सीखा
श्रीनिवास रामानुजन का जन्म 22 दिसंबर 1887 को तमिलनाडु के इरोड में हुआ और उनका पालन-पोषण कुंभकोणम में हुआ। किशोरावस्था में उन्हें जी. एस. कार की गणित-सारांश पुस्तक मिली, और वहाँ से उन्होंने लगभग अपने बल पर हज़ारों सर्वसमिकाएँ और परिणाम विकसित किए।
औपचारिक पाठ्यक्रम के दूसरे विषयों की उपेक्षा के कारण उनकी कॉलेज की पढ़ाई बाधित हुई, और आर्थिक तंगी रही। मद्रास में क्लर्क की नौकरी करते हुए भी वे अपनी नोटबुकों में गणित लिखते रहे।
कैम्ब्रिज को एक पत्र
1913 में उन्होंने अपने परिणाम कैम्ब्रिज के गणितज्ञ जी. एच. हार्डी को भेजे। हार्डी ने उनकी प्रतिभा पहचानी और उन्हें इंग्लैंड बुलाया। इससे पहले देश में उन्हें सीमित पहचान मिली थी; सही मार्गदर्शक और संस्थान ने उनकी प्रतिभा को दुनिया का मंच दिया।
1914 से 1919 के बीच रामानुजन ने पार्टिशन, मॉड्यूलर फ़ॉर्म, कंटीन्यूड फ़्रैक्शन, अनंत श्रेणियों और हाइली कंपोज़िट संख्याओं पर उल्लेखनीय काम किया। 1918 में वे रॉयल सोसाइटी के फ़ेलो बने।
छोटा जीवन, लंबी विरासत
ख़राब स्वास्थ्य के कारण वे 1919 में भारत लौटे और 26 अप्रैल 1920 को केवल 32 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया।
उनके सूत्रों और अनुमानों ने विश्लेषणात्मक संख्या सिद्धांत, q-श्रेणियों, मॉड्यूलर फ़ॉर्म और संयोजन-गणित को गहराई से प्रभावित किया; उनके मॉक थीटा फ़ंक्शन पर शोध आज भी जारी है। उनकी नोटबुकें दशकों तक नए परिणामों का स्रोत रहीं। भारत 22 दिसंबर को राष्ट्रीय गणित दिवस के रूप में मनाता है।
स्रोत
- मैकट्यूटर: श्रीनिवास रामानुजन
- रॉयल सोसाइटी
- भारत सरकार: राष्ट्रीय गणित दिवस
- mathshistory.st-andrews.ac.uk/Biographies/Ramanujan/
- royalsociety.org/