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सौम्या स्वामीनाथन
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विज्ञान और नवाचार · तमिलनाडु

टीबी वार्डों से दुनिया के स्वास्थ्य विज्ञान तक

सौम्या स्वामीनाथन ने भारत में टीबी के मरीज़ों से शुरुआत की और विश्व स्वास्थ्य संगठन की पहली मुख्य वैज्ञानिक बनीं। उनका काम प्रमाण को कार्रवाई में बदलने का है।

सौम्या स्वामीनाथनSoumya Swaminathan
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सौम्या स्वामीनाथन। फ़ोटो: अभिलेखीय चित्र; श्रेय की पुष्टि जारी

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जन्म
1959, चेन्नई
क्षेत्र
क्लिनिकल शोध, टीबी, वैश्विक स्वास्थ्य
संस्थान
ICMR; विश्व स्वास्थ्य संगठन; MSSRF
भूमिकाएँ
WHO उप महानिदेशक; WHO की पहली मुख्य वैज्ञानिक; MSSRF अध्यक्ष
1959चेन्नई में जन्म

अपना रास्ता

सौम्या स्वामीनाथन का जन्म 1959 में चेन्नई में हुआ। वे कृषि वैज्ञानिक एम. एस. स्वामीनाथन की बेटी हैं, लेकिन उनका पेशेवर करियर क्लिनिकल चिकित्सा और जन-स्वास्थ्य में स्वतंत्र रूप से विकसित हुआ।

बाल-चिकित्सा और शोध प्रशिक्षण के बाद उन्होंने टीबी, HIV और TB के आपसी असर, और ऑपरेशनल रिसर्च पर काम किया।

प्रमाण से नीति तक

नेशनल इंस्टीट्यूट फ़ॉर रिसर्च इन ट्यूबरकुलोसिस और बाद में ICMR की नेतृत्व भूमिकाओं में उन्होंने क्लिनिकल और जन-स्वास्थ्य शोध व्यवस्थाओं पर काम किया। टीबी की जाँच और इलाज पर शोध, क्लिनिकल महामारी विज्ञान, और प्रमाण को नीति में बदलना उनका मुख्य क्षेत्र है।

स्वास्थ्य विज्ञान का असर तब बढ़ता है जब प्रमाण शोध-पत्रों से नीति तक और फिर ज़मीन पर अमल तक पहुँचता है।

WHO और घर वापसी

वे विश्व स्वास्थ्य संगठन की उप महानिदेशक और फिर उसकी पहली मुख्य वैज्ञानिक बनीं, जिसकी ज़िम्मेदारी वैश्विक वैज्ञानिक प्रमाणों का संकलन और शोध का समन्वय थी। क्लिनिकल शोधकर्ता से राष्ट्रीय शोध प्रशासक और फिर वैश्विक विज्ञान-नीति नेतृत्व तक, उनका करियर कई स्तरों तक फैला।

भारत लौटकर वे एम. एस. स्वामीनाथन रिसर्च फ़ाउंडेशन की अध्यक्ष और राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम की प्रमुख सलाहकार हैं। टीबी नियंत्रण, शोध प्रशासन और वैश्विक स्वास्थ्य नीति पर उनका प्रभाव भारत से बहुत आगे तक है।

स्रोत