बंधन में एक बचपन
सोमन्ना का जीवन उसी अन्याय से शुरू होता है जिसके ख़िलाफ़ उन्होंने बाद में काम किया। आधिकारिक पद्म प्रशस्ति के अनुसार उनका जन्म 1 जून 1957 को हुआ और वे जेनु कुरुबा समुदाय से हैं, जिसे विशेष रूप से कमज़ोर जनजातीय समूह (PVTG) के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
पिता की मृत्यु के बाद उन्हें चौथी कक्षा के बाद स्कूल छोड़ना पड़ा। परिवार की ज़िम्मेदारी के कारण वे बंधुआ मज़दूरी में धकेले गए और लगभग 18 वर्ष की उम्र तक वहीं रहे। 1978 के बाद इससे निकलकर उन्होंने दलित आंदोलन और आदिवासी संगठन-निर्माण की राह पकड़ी।
जंगल को संगठित करना
1981 में उन्होंने बुडकट्टु कृषिकर संघ (BKS) के साथ एच.डी. कोटे, सरगूरु और मैसूरु क्षेत्र में आदिवासी समुदायों को संगठित करना शुरू किया। वे वन-अधिकार, विस्थापन, PESA और वन अधिकार अधिनियम जैसे मुद्दों पर आंदोलनों और क़ानूनी प्रक्रियाओं से जुड़े।
2009 के उच्च न्यायालय आदेश के संदर्भ में उनकी प्रशस्ति 3,418 परिवारों के पुनर्वास, 19 हाडियों (बस्तियों) को सामुदायिक वन-अधिकार और लगभग 300 परिवारों को व्यक्तिगत अधिकार मिलने का उल्लेख करती है।
दान नहीं, नागरिकता
उनका काम ज़मीन तक सीमित नहीं रहा। BKS के नेतृत्व में विस्थापित परिवारों को खेती की ज़मीन, घर, सड़क, पीने का पानी, स्कूल, पेंशन, राशन कार्ड और मतदाता पहचान-पत्र दिलाने पर भी काम हुआ।
सोमन्ना की कहानी दिखाती है कि समाज-सेवा कभी-कभी दान नहीं, बल्कि क़ानूनी नागरिकता और सामूहिक अधिकार हासिल कराने की लंबी प्रक्रिया होती है।
स्रोत
- पद्म पुरस्कार 2024: आधिकारिक प्रशस्ति
- MyGov: परिचय
- न्यू इंडिया समाचार: पद्म विशेषांक
- padmaawards.gov.in/Document/pdf/CitationsForTickets/2024/2024117.pdf
- secure.mygov.in/padma-shri/?field_year_value=All&page=33
- newindiasamachar.pib.gov.in/WriteReadData/Magazine/2024/Feb/M202402161.pdf