कक्षा और लोकमंच
रोमालो राम की कहानी दो जगहों की है: कक्षा और लोकमंच। आधिकारिक पद्म प्रशस्ति के अनुसार उनका जन्म 3 मार्च 1963 को हुआ और 1985 में उन्होंने जम्मू विश्वविद्यालय से BA किया।
1987 में वे सरकारी शिक्षक बने और दूरस्थ क्षेत्रों में गाँव के बच्चों की शिक्षा से जुड़े। मार्च 2023 में वे ज़ोनल शिक्षा अधिकारी, रामनगर के रूप में सेवानिवृत्त हुए। इस पूरे समय वे डोगरी कविताएँ और लोकगीत लिखते और गाते रहे।
गीतड़ू और भाख को फिर जीवन
1980–81 से उन्होंने “रोमालो राम एंड पार्टी” के नाम से डोगरी लोक-प्रस्तुतियाँ शुरू कीं। आधिकारिक प्रशस्ति उन्हें दो लुप्त होती लोक-शैलियों, गीतड़ू और भाख, के पुनर्जीवन से जोड़ती है और मिशन माँ डोगरी को युवाओं के प्रशिक्षण का आधार बताती है।
प्रशस्ति में 150 से अधिक शिष्यों के सीखने और काम करने के नेटवर्क का उल्लेख है। यह इसलिए अहम है क्योंकि उनका योगदान किसी एक मंचीय प्रस्तुति में नहीं, बल्कि कला को आगे सौंपने की व्यवस्था बनाने में है।
संस्कृति और शिक्षा, एक ही काम
2024 के पद्म श्री ने उन्हें राष्ट्रीय पहचान दी, लेकिन उनका मूल काम स्थानीय भाषा, लोकगीत और युवा कलाकारों के निरंतर प्रशिक्षण में है। शिक्षा सेवा ने उन्हें गाँवों और बच्चों के जीवन से जोड़े रखा।
उनके जीवन में संस्कृति और शिक्षा अलग-अलग खाने नहीं हैं। दोनों मिलकर डोगरी पहचान को बचाने का काम करते हैं।
स्रोत
- पद्म पुरस्कार 2024: आधिकारिक प्रशस्ति
- PIB: पद्म पुरस्कार 2024 सूची
- हिंदुस्तान टाइम्स: परिचय
- padmaawards.gov.in/Document/pdf/CitationsForTickets/2024/2024102.pdf
- pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=1999790&lang=2®=48
- hindustantimes.com/cities/chandigarh-news/president-confers-padma-shri-to-dogri-folk-artist-romalo-ram-101715368453640.html