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रबिलाल टुडू
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शिक्षा · पश्चिम बंगाल

संताली के लिए लिखने वाला एक बैंककर्मी

रबिलाल टुडू की नौकरी लेखा कार्यालय और बैंक में थी। उनका मिशन संताली था: ऐसे नाटक, कहानियाँ और रेडियो-लेखन जिन्होंने उनकी मातृभाषा को मंच, रेडियो और कक्षा में ज़िंदा रखा।

रबिलाल टुडूRabilal Tudu
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रबिलाल टुडू। फ़ोटो: पद्म पुरस्कार, भारत सरकार

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AI आवाज़ में सुनाई गई
जन्म
21 दिसंबर 1949
निधन
4 जून 2026
राज्य
पश्चिम बंगाल
क्षेत्र
संताली साहित्य, नाटक और भाषा
सम्मान
साहित्य अकादमी पुरस्कार 2015; बंग भूषण 2022; पद्म श्री 2026
2015साहित्य अकादमी पुरस्कार
2022बंग भूषण
2026पद्म श्री

नौकरी एक, मिशन दूसरा

रबिलाल टुडू की कहानी उस लेखक की है जिसने बैंक की नौकरी करते हुए भी अपनी मातृभाषा संताली को लेखन का केंद्र बनाए रखा। भारत सरकार की 2026 पद्म प्रशस्ति के अनुसार उनका जन्म 21 दिसंबर 1949 को पश्चिम बंगाल के बर्धमान क्षेत्र में हुआ।

1972 में कालना कॉलेज से स्नातक करने के बाद उन्होंने महालेखाकार, पश्चिम बंगाल के कार्यालय में काम किया और बाद में सेंट्रल बैंक ऑफ़ इंडिया में असिस्टेंट मैनेजर रहे। नौकरी के साथ-साथ वे संताली में नाटक, कहानी और सामाजिक विषयों पर लिखते रहे।

मंच और रेडियो के लिए नाटक

उनकी रचनाओं में भाषा-संकट, समुदाय, लोक-स्मृति और सामाजिक तनाव जैसे विषय बार-बार आते हैं। आधिकारिक प्रशस्ति ‘पारसी खातिर’ को उनकी प्रमुख कृति बताती है; इसी नाटक के लिए उन्हें 2015 का साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला।

‘बीर बिरसा’, ‘समाज बैरी’ और ‘सरदी सेंगेल’ जैसी रचनाएँ मंच और रेडियो, दोनों माध्यमों से लोगों तक पहुँचीं। कुछ नाटकों को विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में जगह मिली, यानी उनका लेखन साहित्यिक मंडलियों तक सीमित नहीं रहा, शिक्षण सामग्री भी बना।

सम्मान, और विदाई

वे साहित्य अकादमी के संताली परामर्श मंडल से जुड़े रहे और पश्चिम बंगाल में संताली लेखन के प्रचार की पहलों में योगदान दिया। 2022 में उन्हें बंग भूषण मिला।

जनवरी 2026 में पद्म श्री की घोषणा हुई। उसी वर्ष 4 जून को उनका निधन हुआ और बाद की आधिकारिक प्रशस्ति ने यह सम्मान मरणोपरांत दर्ज किया।

उनका जीवन दिखाता है कि किसी भाषा को बचाने का सबसे मज़बूत तरीका उसे रोज़मर्रा के जीवन, मंच, रेडियो और शिक्षा में सक्रिय रखना है।

स्रोत