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डॉ. पुन्नियामूर्ति नटेसन
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चिकित्सा · तमिलनाडु

पुराने नुस्ख़े, नई समस्याओं के लिए परखे गए

किसान पीढ़ियों से अपने पशुओं का इलाज पौधों से करते आए हैं। डॉ. पुन्नियामूर्ति नटेसन ने पच्चीस साल उस ज्ञान को लिखने, परखने और सिखाने में लगाए, ताकि एंटीबायोटिक तभी इस्तेमाल हों जब सच में ज़रूरत हो।

डॉ. पुन्नियामूर्ति नटेसनDr. Punniamurthy Natesan
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डॉ. पुन्नियामूर्ति नटेसन। फ़ोटो: DD न्यूज़ के माध्यम से

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AI आवाज़ में सुनाई गई
जन्म
6 मार्च 1957
राज्य
तमिलनाडु
क्षेत्र
पशु-औषध विज्ञान और एथनोवेटरनरी चिकित्सा
सम्मान
पद्म श्री 2026
1,00,000+पशुपालक प्रशिक्षित (पद्म प्रशस्ति)
1,000+पशु-चिकित्सक प्रशिक्षित (पद्म प्रशस्ति)
2001एथनोवेटरनरी पर ध्यान की शुरुआत

पशुओं के औषध विज्ञानी

डॉ. पुन्नियामूर्ति नटेसन वहाँ काम करते हैं जहाँ पशु-स्वास्थ्य, पारंपरिक जड़ी-बूटी ज्ञान और रोगाणुरोधी प्रतिरोध एक-दूसरे से मिलते हैं। आधिकारिक पद्म प्रशस्ति के अनुसार उनका जन्म 6 मार्च 1957 को हुआ और उन्होंने मद्रास वेटरनरी कॉलेज से पशु-औषध विज्ञान पढ़ा, जहाँ उनकी डॉक्टरेट को स्वर्ण पदक मिला।

1980 से उन्होंने TNAU, TANUVAS, ट्रांस-डिसिप्लिनरी यूनिवर्सिटी और NDDB जैसे संस्थानों में शिक्षण, शोध और ज़मीनी प्रसार का काम किया। 2001 के बाद उनका मुख्य ध्यान एथनोवेटरनरी तरीक़ों, ख़ासकर सिद्ध और दूसरे पारंपरिक जड़ी-बूटी नुस्ख़ों, को दर्ज करने और वैज्ञानिक रूप से परखने पर रहा।

कम एंटीबायोटिक, स्वस्थ पशु

प्रशस्ति थनैला, खुरपका-मुँहपका, लम्पी स्किन रोग, और परजीवी, प्रजनन व पाचन संबंधी कई समस्याओं के लिए विकसित और परखे गए मैदानी तरीक़ों का उल्लेख करती है। उनका बड़ा उद्देश्य किसानों को ऐसे तरीक़े देना रहा जिनसे एंटीबायोटिक का अंधाधुंध इस्तेमाल और उनके अवशेष घटें, ‘वन हेल्थ’ और रोगाणुरोधी प्रतिरोध की चिंताओं के अनुरूप।

सही तरीक़े से सिखाना

उन्होंने एथनोवेटरनरी प्रैक्टिसेज़ में स्नातकोत्तर डिप्लोमा और प्रशिक्षण व्यवस्था बनाने में मदद की। प्रशस्ति के अनुसार 1,00,000 से ज़्यादा पशुपालक और 1,000 से ज़्यादा पशु-चिकित्सक उनके प्रशिक्षण और प्रसार कार्यक्रमों से जुड़े हैं।

उन्होंने पारंपरिक ज्ञान को ‘मानो या ठुकराओ’ की बहस से निकालकर दस्तावेज़ीकरण, परख और पेशेवर प्रशिक्षण की राह पर रखा। किसी भी पारंपरिक तरीक़े के लिए यही सबसे टिकाऊ रास्ता है।

स्रोत