न्यायपूर्ण हिस्सेदारी का आंदोलन
मंदा कृष्णा मडिगा का परिचय सामाजिक न्याय और सार्वजनिक नीति से जुड़ा है, इसलिए इसे पक्षपाती भाषा के बजाय तथ्यों के आधार पर लिखना ज़रूरी है। उनकी आधिकारिक पद्म प्रशस्ति उन्हें तेलंगाना के सामाजिक कार्यकर्ता और सार्वजनिक मामलों से जुड़े व्यक्ति के रूप में दर्ज करती है।
1980 के दशक से वे जातिगत भेदभाव और सामुदायिक अधिकारों के मुद्दों पर सक्रिय रहे। 1994 में उन्होंने MRPS की स्थापना की, जिसकी केंद्रीय माँग उप-वर्गीकरण थी, ताकि अनुसूचित जातियों के भीतर के समुदायों में आरक्षण के लाभ ज़्यादा न्यायपूर्ण तरीक़े से बँटें।
आरक्षण से आगे
उनकी सक्रियता सिर्फ़ आरक्षण की बहस तक सीमित नहीं रही। आधिकारिक प्रशस्ति एक दिव्यांग अधिकार संगठन, और पेंशन, स्वास्थ्य सहायता व हाशिये के समुदायों से जुड़े दूसरे अभियानों का भी उल्लेख करती है।
2024 का फ़ैसला
अगस्त 2024 में सर्वोच्च न्यायालय ने राज्यों को अनुसूचित जातियों के उप-वर्गीकरण की अनुमति दी। MRPS ने इसे अपने लंबे अभियान का अहम पड़ाव माना, जबकि अमल और कोटा के अनुपात पर बहस जारी है। 2025 का पद्म श्री सार्वजनिक मामलों में उनके लंबे काम की पहचान है।
नीतियों में बदलाव शायद ही कभी एक चुनावी चक्र में आता है। किसी माँग को दशकों तक लोकतांत्रिक, क़ानूनी और संगठनात्मक रास्तों से ज़िंदा रखना अपने आप में लगन का उदाहरण है।
स्रोत
- पद्म पुरस्कार 2025: आधिकारिक प्रशस्तियाँ
- द न्यूज़ मिनट: तेलंगाना में SC उप-वर्गीकरण
- द न्यू इंडियन एक्सप्रेस: SC वर्गीकरण पर MRPS
- presidentofindia.gov.in/files/2023-06/padma_2nd_3.pdf
- thenewsminute.com/telangana/sc-sub-classification-in-telangana-manda-krishna-madiga-seeks-higher-quota-for-madigas
- newindianexpress.com/states/telangana/2025/Feb/06/injustice-to-madigas-as-sc-classification-was-unscientific-mrps