बहुत कम उम्र में पौधशाला
आधिकारिक पद्म प्रशस्ति के अनुसार हैंगथिंग ने 1988 में पौधशाला शुरू की, जो आगे चलकर जुंग्याम नर्सरी एंड हॉर्टिकल्चर फ़ार्मिंग सोसाइटी बनी। सीमा पर बसे दूरदराज़ नोकलाक ज़िले में उन्होंने ऐसे फल, पौधे और सब्ज़ियाँ लाईं जो वहाँ पहले नहीं उगती थीं। मक़सद सिर्फ़ विविधता बढ़ाना नहीं, खेती को एक ही मौसम पर निर्भरता से मुक्त करना था।
सम्मान के बाद एक समारोह में उन्होंने अपने शुरुआती दिनों को याद किया, जब वे फेंके हुए बीज लगाते और छोटे-छोटे प्रयोग करते थे। यही उनकी कहानी का मूल है: कम संसाधनों वाली जगह में बारीक नज़र और लगन से खेती का नया मॉडल बनाना।
एग्रो-रिवोल्यूशन सोसाइटी
2001 में उन्होंने एग्रो-रिवोल्यूशन सोसाइटी बनाई, जिसका ध्यान मौसमी खेती, बाग़बानी और पशुपालन को जोड़कर पारंपरिक एक-फ़सली ढर्रे से आगे बढ़ने पर था। स्थानीय रिपोर्टें उन्हें ऐसे किसान के रूप में बताती हैं जिन्होंने अपना सीखा सैकड़ों दूसरे किसानों के साथ बाँटा।
टेस्ट ऑफ़ नोकलाक
2018 में अपनी पत्नी मोंगशाई और स्थानीय किसानों के साथ उन्होंने टेस्ट ऑफ़ नोकलाक सोसाइटी (TONS) बनाई। 2021 तक सोसाइटी ने 15 से ज़्यादा उत्पाद बाज़ार में उतारे और ‘मेड इन नोकलाक’ का नाम ज़िले के बाहर भी पहचाना जाने लगा। यह अहम क़दम था: किसान अब सिर्फ़ कच्ची उपज नहीं बेच रहे थे, उसकी प्रोसेसिंग और ब्रांडिंग से भी जुड़ रहे थे।
खेत से स्थानीय अर्थव्यवस्था तक
पौधशाला और खेत के साथ वे एक होमस्टे भी चलाते हैं, जो खेती, स्थानीय उत्पादों और ग्रामीण पर्यटन को जोड़ता है। 2021 में उन्हें ज़िले का सर्वश्रेष्ठ मत्स्य किसान पुरस्कार मिला। 2025 में पद्म श्री मिलने के बाद उन्होंने इसे नागालैंड के किसानों और खियामनियुंगन समुदाय को समर्पित किया।
उनका काम बताता है कि विविधता छोटे खेतों को मज़बूत बनाती है, प्रोसेसिंग और ब्रांडिंग स्थानीय उपज का मूल्य बढ़ाती है, और एक दूरदराज़ ज़िला भी खेती के प्रयोगों का केंद्र बन सकता है।
स्रोत
- पद्म पुरस्कार 2025: आधिकारिक प्रशस्ति
- नागालैंड DIPR: सम्मान समारोह रिपोर्ट
- ईस्टर्न मिरर: 'नोकलाक के फल वाले'
- presidentofindia.gov.in/files/2023-06/padma_2nd_3.pdf
- ipr.nagaland.gov.in/node/16987
- easternmirrornagaland.com/fruit-man-of-noklak-pushes-for-tradition-of-self-sufficiency