एक असामान्य रास्ता
एडवलेथ कक्कट जानकी अम्माल का जन्म 4 नवंबर 1897 को केरल के तेल्लिचेरी (थलस्सेरी) में हुआ। उस समय भारतीय महिलाओं के लिए विज्ञान में ऊँचा करियर दुर्लभ था।
उन्होंने वनस्पति विज्ञान पढ़ा, अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ़ मिशिगन से उच्च डिग्रियाँ लीं, और कोशिका-आनुवंशिकी, यानी गुणसूत्रों और आनुवंशिकता के अध्ययन, में विशेषज्ञता हासिल की। अपने दौर की सामाजिक अपेक्षाओं के बीच विदेश में उच्च शिक्षा और स्वतंत्र वैज्ञानिक करियर चुनना असाधारण था।
गन्ना और गुणसूत्र एटलस
कोयंबटूर के गन्ना प्रजनन संस्थान में उन्होंने गन्ने की किस्मों और गुणसूत्रों के व्यवहार पर काम किया, जो भारतीय परिस्थितियों के लिए प्रजनन में उपयोगी था। पॉलीप्लॉइडी (गुणसूत्रों के अतिरिक्त सेट), गुणसूत्र संख्याएँ, प्रजातियों के बीच संकर और फ़सलों की कोशिका-आनुवंशिकी उनके मुख्य क्षेत्र थे।
बाद में इंग्लैंड में वे रॉयल हॉर्टिकल्चरल सोसाइटी से जुड़ीं और सी. डी. डार्लिंगटन के साथ “क्रोमोसोम एटलस ऑफ़ कल्टिवेटेड प्लांट्स” पर काम किया।
घर वापसी, और देसी वनस्पतियाँ
आज़ादी के बाद वे भारत लौटीं और भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण तथा पादप-संसाधनों के काम से जुड़ीं। वे जैव विविधता और देसी वनस्पतियों के संरक्षण की पक्षधर रहीं।
उन्होंने भारतीय महिला वैज्ञानिकों के लिए एक दिखती हुई मिसाल बनाई और वनस्पति विज्ञान व कोशिका-आनुवंशिकी को खेती और संरक्षण से जोड़ा। उनकी विरासत सिर्फ़ शुरुआती महिलाओं में होना नहीं, बल्कि उनके विज्ञान की गुणवत्ता है।
स्रोत
- भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण न्यूज़लेटर
- CSIR-IIIM हर्बेरियम: जानकी अम्माल
- रॉयल हॉर्टिकल्चरल सोसाइटी
- bsi.gov.in/uploads/userfiles/file/ENVIS/ENVIS%20NEWSLETTER/ENVIS%20Newsletter%20Vol.%2020%282%29%202015.pdf
- iiim.res.in/herbarium/edavaleth-kakkat-janaki-ammal.htm
- rhs.org.uk/