कलकत्ता में जुगाड़
जगदीश चंद्र बोस का जन्म 30 नवंबर 1858 को मयमनसिंह क्षेत्र में हुआ, जो आज बांग्लादेश में है। कैम्ब्रिज और लंदन में प्राकृतिक विज्ञान पढ़ने के बाद वे प्रेसीडेंसी कॉलेज, कलकत्ता में भौतिकी पढ़ाने लगे।
उन्हें नस्लीय भेदभाव, असमान वेतन और प्रयोगशाला संसाधनों की कमी का सामना करना पड़ा। वे रुके नहीं: उपकरण ख़ुद बनाए और प्रयोग करते रहे।
पहले तरंगें, फिर पौधे
1890 के दशक में उन्होंने मिलीमीटर-तरंग यानी माइक्रोवेव विकिरण पैदा करने और पकड़ने के उपकरण बनाए और वायरलेस संकेतों का प्रदर्शन किया; सेमीकंडक्टर जैसे डिटेक्टर और वेवगाइड पुर्ज़ों पर उनका शुरुआती काम भी है।
बाद में उनका शोध पौधों की ओर मुड़ा। अत्यंत संवेदनशील उपकरणों, विशेषकर क्रेस्कोग्राफ़, से उन्होंने पौधों की वृद्धि और उद्दीपनों पर उनकी प्रतिक्रियाओं को अंकों में दर्ज करने की कोशिश की। भौतिकी, उपकरण-इंजीनियरिंग और जीवविज्ञान की सीमाएँ इस तरह जोड़ने वाला वैज्ञानिक जीवन दुर्लभ है।
पूरे विज्ञान के लिए एक संस्थान
1917 में उन्होंने अंतर्विषयी शोध के लिए बोस इंस्टीट्यूट की स्थापना की; यह भारत के सबसे पुराने आधुनिक शोध संस्थानों में है। उन्होंने भारतीय विद्यार्थियों को दिखाया कि प्रायोगिक विज्ञान केवल यूरोप का एकाधिकार नहीं है, और उनकी विरासत रेडियो विज्ञान से जैव-भौतिकी तक फैली है।
स्रोत
- बोस इंस्टीट्यूट
- रॉयल सोसाइटी
- एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका: जे. सी. बोस
- boseinst.ac.in/
- royalsociety.org/
- britannica.com/biography/Jagadish-Chandra-Bose