शुरुआत
हरविंदर सिंह ने भारतीय पैरा-तीरंदाज़ी में कई ‘पहली बार’ दर्ज किए हैं। आधिकारिक पद्म प्रशस्ति के अनुसार बचपन में एक इंजेक्शन के दुष्प्रभाव से उनके बाएँ पैर में स्थायी दिव्यांगता हो गई। उन्होंने 2012 में कोच जीवनजोत सिंह तेजा के मार्गदर्शन में तीरंदाज़ी शुरू की और 2017 में अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत की।
पहली बार की एक कड़ी
2018 के जकार्ता एशियाई पैरा खेलों में पुरुष व्यक्तिगत रिकर्व ओपन का स्वर्ण जीतकर वे पैरा-तीरंदाज़ी में एशियाई पैरा खेल स्वर्ण जीतने वाले पहले भारतीय बने। टोक्यो 2020 पैरालंपिक के कांस्य ने एक और इतिहास रचा: वे पैरालंपिक पदक जीतने वाले पहले भारतीय तीरंदाज़ बने। हांगझोउ एशियाई पैरा खेलों में टीम कांस्य के बाद पेरिस 2024 ने उन्हें उनका सबसे बड़ा पल दिया।
पेरिस, और भारत के लिए स्वर्ण
पेरिस 2024 पैरालंपिक में पुरुष रिकर्व ओपन का स्वर्ण जीतकर हरविंदर भारत के पहले पैरालंपिक तीरंदाज़ी स्वर्ण पदक विजेता बने। इसने सिर्फ़ पदक तालिका नहीं बढ़ाई; इसने पैरा-तीरंदाज़ी को देश की खेल चर्चा में ऊपर ला दिया। 2021 में अर्जुन पुरस्कार और 2022 में हरियाणा भीम पुरस्कार के बाद 2025 में उन्हें पद्म श्री मिला।
तीरंदाज़ी के मैदान पर एक अर्थशास्त्री
उनकी दूसरी कहानी पढ़ाई की है। पंजाबी विश्वविद्यालय, पटियाला से अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर के बाद उन्होंने अर्थशास्त्र में PhD की राह पकड़ी। शीर्ष स्तर का प्रशिक्षण और डॉक्टरेट का शोध साथ-साथ चलाना एक दुर्लभ अनुशासन दिखाता है।
उनकी कहानी को सिर्फ़ ‘दिव्यांगता पर जीत’ के रूप में नहीं कहना चाहिए। असली सबक़ वर्षों का तकनीकी प्रशिक्षण, मुक़ाबले में डटे रहना और पढ़ाई का अनुशासन है। शीर्ष प्रदर्शन सहानुभूति से नहीं, उत्कृष्टता से आता है।
स्रोत
- पद्म पुरस्कार 2025: आधिकारिक प्रशस्ति
- PIB: पद्म पुरस्कार 2025 समारोह
- अंतरराष्ट्रीय पैरालंपिक समिति: हरविंदर सिंह पर लेख
- विकिमीडिया कॉमन्स: Nicolas22g का फ़ोटो (CC BY-SA 4.0)
- padmaawards.gov.in/Document/pdf/CitationsForTickets/2025/202562.pdf
- pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2131791&lang=2®=48
- paralympic.org/news/india-s-harvinder-singh-motivated-golden-success
- commons.wikimedia.org/wiki/File:Harvinder_Singh_-_Para_Archery_at_the_2024_Summer_Paralympics.jpg