रेडियो आकाश को सुनना
गोविंद स्वरूप का जन्म 23 मार्च 1929 को ठाकुरद्वारा, उत्तर प्रदेश में हुआ। भौतिकी की पढ़ाई के बाद वे रेडियो खगोल विज्ञान के प्रशिक्षण के लिए ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका गए।
विदेश में जमे-जमाए अवसरों के बावजूद वे भारत लौटे और TIFR में रेडियो खगोल विज्ञान समूह बनाया। देश में बड़े वैज्ञानिक उपकरण बनाना जोखिम भरा फ़ैसला था।
एक पहाड़ी और डिशों का मैदान
ऊटी की पहाड़ी ढलान का चतुराई से उपयोग करके ऊटी रेडियो टेलीस्कोप बनाया गया। बाद में पुणे के पास जायंट मीटरवेव रेडियो टेलीस्कोप (GMRT) की कल्पना और निर्माण में उनका नेतृत्व केंद्रीय रहा।
उनका बड़ा योगदान था बड़ी रेडियो दूरबीनों का किफ़ायती डिज़ाइन, इंटरफ़ेरोमेट्री (जिसमें कई एंटेना मिलकर एक की तरह काम करते हैं), और कम आवृत्ति वाले रेडियो खगोल विज्ञान का ढाँचा।
रेडियो खगोल विज्ञान के नक्शे पर भारत
अपनी आवृत्ति सीमा और पैमाने के कारण GMRT विश्व-स्तरीय सुविधा बनी। इसने भारत को रेडियो खगोल विज्ञान के वैश्विक नक्शे पर स्थापित किया और पल्सर, आकाशगंगाओं, ब्रह्मांड विज्ञान और क्षणिक घटनाओं का अध्ययन करने वाले अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं को आकर्षित किया।
किफ़ायती इंजीनियरिंग और वैज्ञानिक महत्वाकांक्षा एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। स्थानीय भूगोल और इंजीनियरिंग की रचनात्मकता विश्व-स्तरीय उपकरण बना सकती है।
स्रोत
- NCRA श्रद्धांजलि: गोविंद स्वरूप
- NCRA-TIFR
- GMRT
- ncra.tifr.res.in/ncra/obituary-prof-swarup
- ncra.tifr.res.in/
- gmrt.ncra.tifr.res.in/