1944 में डॉक्टर ऑफ़ साइंस
असीमा चटर्जी का जन्म 23 सितंबर 1917 को कलकत्ता में हुआ। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से रसायन की उच्च शिक्षा ली।
1944 में वे किसी भारतीय विश्वविद्यालय से डॉक्टर ऑफ़ साइंस पाने वाली शुरुआती भारतीय महिलाओं में रहीं। 1930–40 के दशक के अकादमिक माहौल में एक महिला वैज्ञानिक के रूप में डॉक्टरेट शोध और प्रयोगशाला नेतृत्व खड़ा करना अपने आप में बड़ी चुनौती थी।
औषधीय पौधों का रसायन
उनका शोध प्राकृतिक उत्पादों पर केंद्रित था: एल्कलॉइड, कूमेरिन और औषधीय पौधों का रसायन। उन्होंने भारतीय पौधों से जैव-सक्रिय यौगिक अलग किए, उनकी पहचान की, और उनकी मलेरिया-रोधी और मिर्गी-रोधी संभावनाओं का अध्ययन किया।
उनके समूह के काम ने औषधीय पौधों के देसी ज्ञान को आधुनिक रासायनिक पहचान से जोड़ा। ऐसा ज्ञान तब मूल्यवान है जब उसे रसायन और प्रमाण से परखा जाए; किसी चीज़ के असर का दावा हमेशा उसी प्रमाण पर टिका होना चाहिए।
रसायनज्ञों का एक स्कूल
शोध के साथ उन्होंने विद्यार्थियों की एक बड़ी पीढ़ी तैयार की और कलकत्ता विश्वविद्यालय में कार्बनिक रसायन का शोध-स्कूल बनाया। वे भारतीय विज्ञान कांग्रेस की जनरल प्रेसिडेंट बनने वाली पहली महिला भी थीं।
भारतीय औषधीय रसायन पर, और विज्ञान में महिलाओं की जगह पर, उनका प्रभाव गहरा है। उन्होंने दिखाया कि विश्व-स्तरीय रासायनिक शोध भारतीय विश्वविद्यालयों में हो सकता है।
स्रोत
- INSA फ़ेलो और अभिलेख
- शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार अभिलेख
- कलकत्ता विश्वविद्यालय
- insaindia.res.in/
- ssbprize.gov.in/
- caluniv.ac.in/