लॉग इन
EN हिंदी
डॉ. अर्मिडा फ़र्नांडिस
← सभी नायक
चिकित्सा · महाराष्ट्र

अस्पताल के वार्ड से आगे

डॉ. अर्मिडा फ़र्नांडिस ने मुंबई के एक सरकारी अस्पताल में बरसों तक नन्हे, समय से पहले जन्मे बच्चों को बचाया। फिर उन्होंने देखा कि घर लौटने के बाद उन बच्चों के साथ क्या होता है, और उनके पीछे-पीछे वहाँ तक पहुँचने के लिए एक संस्था बनाई।

डॉ. अर्मिडा फ़र्नांडिसDr. Armida Fernandez
WhatsApp X Facebook

पद्म श्री ग्रहण करती डॉ. अर्मिडा फ़र्नांडिस। फ़ोटो: भारत सरकार, विकिमीडिया कॉमन्स

यह कहानी सुनें0:00 / 2:50
AI आवाज़ में सुनाई गई
जन्म
6 जुलाई 1943, धारवाड़, कर्नाटक
क्षेत्र
नवजात चिकित्सा, माँ और बच्चे का स्वास्थ्य
स्थापना
ह्यूमन मिल्क बैंक, सायन (1989); SNEHA (1999)
सम्मान
पद्म श्री 2026 (चिकित्सा)
1989सायन अस्पताल में ह्यूमन मिल्क बैंक
1999SNEHA की स्थापना
2026पद्म श्री

नवजात देखभाल से जन स्वास्थ्य तक

डॉ. अर्मिडा फ़र्नांडिस का करियर अस्पताल के एक वार्ड से शुरू होकर पूरे शहर के जन स्वास्थ्य तक फैलता है। उनकी आधिकारिक पद्म प्रशस्ति उन्हें नवजात चिकित्सा, माँ और बच्चे के स्वास्थ्य, पोषण और समुदाय-आधारित जन स्वास्थ्य में अग्रणी बताती है। MBBS के दौरान उन्होंने कई अकादमिक पदक जीते, और 1970 के दशक से मुंबई के लोकमान्य तिलक म्युनिसिपल मेडिकल कॉलेज और जनरल अस्पताल में बच्चों और नवजातों की चिकित्सा से जुड़ीं। बाद में वे वहाँ नवजात विभाग की प्रमुख और 1999 से 2001 तक डीन रहीं।

ज़रूरत से जन्मा मिल्क बैंक

SNEHA के इतिहास के अनुसार 1989 में उन्होंने सायन अस्पताल में ह्यूमन मिल्क बैंक शुरू किया, जिसे संस्था एशिया का पहला बताती है। समय से पहले जन्मे और कम वज़न वाले बच्चों के लिए, जब माँ का दूध उपलब्ध न हो, दान किया गया माँ का दूध जीवनरक्षक सहारा बन सकता है। यह मिल्क बैंक उस समस्या का व्यावहारिक हल था जो वे वार्ड में रोज़ देखती थीं।

बड़ी समस्या अस्पताल के बाहर थी

1990 के दशक की शुरुआत में उन्होंने और उनकी टीम ने एक चिंताजनक बात देखी। अस्पताल में बचाए गए बच्चे घर लौटकर फिर ख़तरे में पड़ जाते थे, ख़राब पोषण, जानकारी की कमी और स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित पहुँच की वजह से। इसी ने उन्हें वार्ड से आगे देखने और समुदायों व सरकारी व्यवस्था के साथ काम करने की ओर मोड़ा। 1999 में उन्होंने SNEHA की स्थापना की।

SNEHA: इलाज से स्वास्थ्य में बराबरी तक

SNEHA का मॉडल सामुदायिक काम, सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था को मज़बूत करने और शोध को जोड़ता है। माँ और नवजात का स्वास्थ्य, बच्चों का पोषण, किशोर स्वास्थ्य और लिंग-आधारित हिंसा जैसे क्षेत्रों में काम करते हुए संस्था स्वास्थ्य को सिर्फ़ बीमारी का इलाज नहीं, बल्कि रहन-सहन, पोषण और पहुँच से जुड़ा सवाल मानती है। सोच का यही बदलाव शायद उनकी सबसे अहम विरासत है।

उनकी कहानी बताती है कि अच्छी चिकित्सा और सामुदायिक स्वास्थ्य साथ-साथ चलते हैं, और कोई नवाचार तभी सबसे ज़्यादा मायने रखता है जब वह ज़रूरतमंद तक पहुँचे।

स्रोत