दो तरह की पढ़ाई
यानुंग जमोह लेगो की कहानी स्वदेशी ज्ञान और औपचारिक कृषि-शिक्षा के बीच एक पुल की कहानी है। आधिकारिक पद्म प्रशस्ति के अनुसार उनका जन्म 9 जुलाई 1963 को पूर्वी सियांग के सिका तोदे गाँव में हुआ।
असम कृषि विश्वविद्यालय, जोरहाट से B.Sc. और M.Sc. के बाद वे 1988 में अरुणाचल प्रदेश कृषि विभाग से जुड़ीं और जुलाई 2023 तक सेवा में रहीं।
पिता की सीख से
जड़ी-बूटी ज्ञान की राह उन्हें अपने पिता से मिली, जो लोक-चिकित्सक थे। प्रशस्ति 1981 से लगभग 15 वर्षों की शागिर्दी और 1995 से उनकी स्वतंत्र पद्धति का कालक्रम देती है।
2009 में उन्होंने ‘इंडिजिनस हर्बल हेरिटेज’ नाम की पहल शुरू की, जिसका ध्यान औषधीय पौधों की खेती, घरेलू किचन गार्डन और पारंपरिक ज्ञान की जागरूकता पर था। प्रशस्ति के अनुसार यह पहल 1 लाख से अधिक लोगों तक औषधीय-पौधों की शिक्षा पहुँचा चुकी है और हर साल लगभग 5,000 औषधीय पौधे लगाती है।
सम्मान भी, प्रमाण भी
उनके परिचय का चिकित्सा वाला हिस्सा सावधानी माँगता है। प्रशस्ति में इलाज के दावे हैं, जिनमें मरीज़ों की आपस में न मिलने वाली संख्याएँ और गंभीर बीमारियाँ ठीक करने की बातें शामिल हैं। ये एक सरकारी प्रशस्ति के दावे हैं, और यह संग्रह इन्हें क्लिनिकल रूप से सिद्ध नहीं बताता।
उनका सबसे मज़बूत और सबसे अच्छी तरह दर्ज योगदान पारंपरिक औषधीय-पौधों के ज्ञान को बचाना, उगाना और सिखाना है, और यहाँ हम उसी का सम्मान करते हैं।
स्रोत
- पद्म पुरस्कार 2024: आधिकारिक प्रशस्ति
- PIB: पद्म पुरस्कार 2024 सूची
- अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल: विज्ञप्ति, अप्रैल 2024
- द अरुणाचल टाइम्स: रिपोर्ट
- साक्षात्कार वीडियो
- padmaawards.gov.in/Document/pdf/CitationsForTickets/2024/202466.pdf
- pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=1999790
- arunachalgovernor.gov.in/pr/2024/240423_Governor_congratulates_Yanung_Jamoh_Lego.pdf
- archive.arunachaltimes.in/index.php/2024/04/24/herbal-medicine-expert-yanung-jamoh-lego-honoured-with-padma-shri-award/
- youtube.com/watch?v=CxGaOwNQQZg