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विनायक लोहानी
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समाज सेवा · पश्चिम बंगाल

तीन बच्चे, फिर एक 'परिवार'

विनायक लोहानी IIM कलकत्ता से बिना नौकरी लिए निकल आए। उन्होंने कोलकाता के पास एक छोटा भवन किराए पर लिया, तीन बच्चों को साथ रखा, और उनके खाने का ख़र्च लेक्चर देकर चलाया। यहीं से 'परिवार' शुरू हुआ।

विनायक लोहानीVinayak Lohani
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विनायक लोहानी। फ़ोटो: पद्म पुरस्कार, भारत सरकार

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जन्म
12 अप्रैल 1978
राज्य
पश्चिम बंगाल (मध्य प्रदेश में भी काम)
शिक्षा
IIT खड़गपुर से B.Tech; IIM कलकत्ता से MBA
क्षेत्र
बाल कल्याण, आवासीय शिक्षा, पोषण, ग्रामीण स्वास्थ्य
सम्मान
राष्ट्रीय बाल कल्याण पुरस्कार 2011; पद्म श्री 2025
3बच्चे, 2003 में
2,100+आवासीय बच्चे बंगाल में (जन. 2024)
2025पद्म श्री

प्लेसमेंट को ना

विनायक लोहानी की कहानी करियर की सफलता की आम परिभाषा को उलट देती है। आधिकारिक पद्म प्रशस्ति के अनुसार उनका जन्म 12 अप्रैल 1978 को हुआ; उन्होंने 2000 में IIT खड़गपुर से B.Tech और 2003 में IIM कलकत्ता से MBA किया।

IIM से निकलते समय उन्होंने ऊँचे वेतन वाला प्लेसमेंट नहीं चुना। स्वामी विवेकानंद के निःस्वार्थ सेवा के आदर्श से प्रेरित होकर उन्होंने 2003 में कोलकाता के बाहरी इलाक़े में किराए के एक छोटे भवन में केवल तीन बच्चों के साथ परिवार शुरू किया।

लेक्चर से चला ख़र्च

शुरुआत में पैसा नहीं था। प्रशस्ति और परिवार के रिकॉर्ड बताते हैं कि शुरुआती ख़र्च चलाने के लिए वे मैनेजमेंट प्रवेश-परीक्षा की तैयारी करने वालों को लेक्चर देते थे। 2004 के अंत तक संस्था ने स्थायी परिसर के लिए ज़मीन ख़रीद ली।

जनवरी 2024 के आधिकारिक आँकड़े के अनुसार बंगाल की उसकी आवासीय संस्थाओं में 2,100 से अधिक बच्चे रहते थे। यह मॉडल केवल आश्रय नहीं, बल्कि लंबी देखभाल, औपचारिक शिक्षा और वयस्क होने तक सहारे पर आधारित है।

एक घर नहीं, एक व्यवस्था

2016 के बाद परिवार ने मध्य प्रदेश के आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में विस्तार किया। प्रशस्ति के 10 फ़रवरी 2025 के आँकड़ों के अनुसार 834 सेवा कुटीर 55,000 से अधिक बच्चों को पोषण और शिक्षा सहायता दे रहे थे, और चार आवासीय संस्थाओं में लगभग 1,350 बच्चे थे। स्वास्थ्य कार्यों में 93 मुफ़्त 24x7 एम्बुलेंस, नेत्र शिविर और ऑपरेशन, और 21 मोबाइल मेडिकल क्लिनिक शामिल हैं।

असली बात आकार नहीं, बनावट है: एक व्यक्ति का छोटा प्रयोग बहुत-से हाथों के साथ शिक्षा, भोजन, आपात परिवहन, नेत्र-देखभाल और प्राथमिक स्वास्थ्य की एक जुड़ी व्यवस्था बन गया।

स्रोत