कॉस्मिक किरणों से उपग्रहों तक
उडुपी रामचंद्र राव का जन्म 10 मार्च 1932 को कर्नाटक में हुआ। कॉस्मिक किरणों और अंतरिक्ष विज्ञान में शोध के बाद वे विक्रम साराभाई के काम से जुड़े।
अमेरिका में उन्होंने उपग्रह प्रयोगों का अनुभव लिया, फिर भारत लौटकर देश में डिज़ाइन और निर्मित उपग्रहों की दिशा में काम किया।
आर्यभट और उसके बाद
आर्यभट उपग्रह परियोजना में, और उसके बाद भास्कर, APPLE तथा परिचालन संचार और रिमोट-सेंसिंग उपग्रहों के विकास में उनका नेतृत्व केंद्रीय रहा।
मुख्य चुनौती थी विदेश में बने और विदेश से छोड़े जाने वाले तंत्रों पर निर्भरता से स्वदेशी डिज़ाइन क्षमता की ओर बढ़ना। राव ने सीख को ऐसे उपग्रहों में बदला जो भरोसेमंद सेवा की तरह काम करें।
रोज़मर्रा की ज़िंदगी में उपग्रह
1984 से 1994 तक ISRO अध्यक्ष के रूप में उन्होंने प्रक्षेपण यानों और अनुप्रयोगों, दोनों को आगे बढ़ाया। बाद में वे PRL और अंतरिक्ष नीति में सक्रिय रहे।
उपग्रह ढाँचे ने टेलीविज़न, दूरसंचार, मौसम, संसाधन मानचित्रण और आपदा सहायता में भारत की क्षमता बदल दी। कोई प्रोटोटाइप तभी बदलाव लाता है जब उसे भरोसेमंद राष्ट्रीय सेवा के पैमाने तक ले जाया जाए।
स्रोत
- ISRO: यू. आर. राव
- भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला
- ISRO
- isro.gov.in/ISRO_EN/URRao.html
- prl.res.in/
- isro.gov.in/