एक गणितज्ञ का मोड़
सुरेश हरिलाल सोनी की पढ़ाई गणित में हुई, लेकिन उन्होंने जीवन की दिशा कुष्ठ-प्रभावित लोगों की सेवा की ओर मोड़ दी। आधिकारिक पद्म प्रशस्ति के अनुसार उनका जन्म 23 नवंबर 1944 को वडोदरा ज़िले के शिनोर में हुआ और 1966 में उन्होंने एम.एस. यूनिवर्सिटी ऑफ़ बड़ौदा से गणित में विशिष्टता सहित M.Sc. पूरी की।
छात्र-जीवन में रिमांड होम के बच्चों को कहानियाँ सुनाने और मुफ़्त ट्यूशन देने से उनका सामाजिक जुड़ाव शुरू हुआ।
साथ रहना
1970 से उन्होंने कुष्ठ रोगियों के साथ स्वैच्छिक काम शुरू किया: दवाएँ, इंजेक्शन, घावों की मरहम-पट्टी और बस्तियों में पुनर्वास। उन्होंने विश्वविद्यालय में लेक्चरर जैसी आरामदायक नौकरी छोड़ी और कुष्ठ-प्रभावित लोगों के साथ रहने का फ़ैसला किया।
1988 में उन्होंने पत्नी के साथ 20 निवासियों और उनके बच्चों के साथ सहयोग कुष्ठ यज्ञ ट्रस्ट की शुरुआत की।
सम्मान की एक बस्ती
प्रशस्ति के समय सहयोग समुदाय में 1,050 निवासी थे: कुष्ठ-प्रभावित लोग और उनके परिजन, दिव्यांगजन, स्किज़ोफ़्रेनिया या बौद्धिक दिव्यांगता के साथ जी रहे लोग, असहाय महिलाएँ और पुरुष, और बच्चे। परिसर में स्कूल, 45 बिस्तरों का अस्पताल, फ़िज़ियोथेरेपी केंद्र, आवास और दूसरी सुविधाएँ हैं।
उनका काम बीमारी के इलाज से आगे जाता है। यह ऐसे पुनर्वास की कहानी है जो कलंक, आजीविका, शिक्षा और सम्मान, सबको साथ लेकर चलता है।
स्रोत
- पद्म पुरस्कार 2025: आधिकारिक प्रशस्ति
- पद्म पुरस्कार 2025: अधिसूचना
- padmaawards.gov.in/Document/pdf/CitationsForTickets/2025/2025125.pdf
- padmaawards.gov.in/Document/pdf/notifications/PadmaAwards/2025.pdf