खेत, एक व्यवस्था
सुभाष खेतुलाल शर्मा ने तीन दशकों से अधिक समय प्राकृतिक खेती के व्यावहारिक प्रयोगों में लगाया है। आधिकारिक पद्म प्रशस्ति के अनुसार उनका जन्म 13 दिसंबर 1952 को यवतमाल में हुआ।
B.Com की पढ़ाई के बाद उन्होंने खेती को अपनी प्रयोगशाला बनाया और ऐसे तरीकों पर काम किया जिनमें मिट्टी, पानी, जैव-विविधता और पशुधन को एक एकीकृत व्यवस्था माना जाता है।
ढलान की रेखा पर कूँड़
उनकी एक ख़ास तकनीक कंटूर खेती और अवरोधी कूँड़ है, जो बारिश का पानी रोकती है, रिसाव बढ़ाती है और बहाव घटाती है। वे रासायनिक खाद, कीटनाशक और खरपतवार-नाशक से बचते हैं और मिश्रित फ़सल, फ़सल-चक्र और मेड़ पर पेड़ लगाने पर ज़ोर देते हैं।
प्रशस्ति मिट्टी के जैविक कार्बन में सुधार जैसे नतीजों का उल्लेख करती है। ये आँकड़े उनके दर्ज खेत-संदर्भ के हैं, हर जगह की गारंटी नहीं।
सीखने वालों का नेटवर्क
उनका प्रभाव इस बात में भी दिखता है कि उनका ज्ञान कितनी दूर तक पहुँचा। प्रशस्ति के अनुसार किसानों, शोधकर्ताओं, NGO कार्यकर्ताओं, KVK विस्तार-कर्मियों और कृषि विशेषज्ञों सहित 2 लाख से अधिक लोग उनके प्रशिक्षणों, खेत-भ्रमण और कार्यशालाओं में शामिल हुए।
कृषि विश्वविद्यालयों और राष्ट्रीय सम्मेलनों ने उनकी पद्धतियों का अध्ययन किया और उन्हें मान्यता दी। उनकी कहानी बताती है कि टिकाऊ खेती का असली विस्तार एक सफल खेत नहीं, सीखने वालों का नेटवर्क है।
स्रोत
- पद्म पुरस्कार 2025: आधिकारिक प्रशस्ति
- पद्म पुरस्कार 2025: अधिसूचना
- पद्म पुरस्कार: आधिकारिक पोर्टल
- padmaawards.gov.in/Document/pdf/CitationsForTickets/2025/2025124.pdf
- padmaawards.gov.in/Document/pdf/notifications/PadmaAwards/2025.pdf
- padmaawards.gov.in/