कक्षा और मंच
सिल्बी पासाह का जीवन दो दुनियाओं को जोड़ता है: कक्षा और सांस्कृतिक मंच। आधिकारिक पद्म प्रशस्ति के अनुसार उनका जन्म 3 मार्च 1952 को हुआ और वे शिलांग में रहती हैं।
हिंदी में कोविद की योग्यता के बाद 1982 में वे खासी जयंतिया नेशनल गवर्नमेंट अपर प्राइमरी स्कूल, मावखर में हिंदी शिक्षिका बनीं। बाद में सर्व शिक्षा अभियान और DERT की संसाधन-व्यक्ति के रूप में उन्होंने शिक्षकों को कला, शिल्प, अभिनय, नृत्य और गायन में प्रशिक्षित किया।
भाषाओं के बीच पुल
उन्होंने ऑल इंडिया रेडियो शिलांग के “हिंदी पाठ” कार्यक्रम में भी काम किया और 2005 में केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा में हिंदी–खासी व्यतिरेकी व्याकरण तैयार करने से जुड़ीं।
उनके लिए भाषा सिखाना एकतरफ़ा नहीं था। हिंदी अच्छी तरह पढ़ाने के लिए उस खासी भाषा को समझना भी ज़रूरी था जो विद्यार्थी अपने साथ लाते थे।
लोकगीतों की रखवाली
संस्कृति के क्षेत्र में उन्होंने खासी-जयंतिया लोकगीतों, पारंपरिक वाद्यों और नृत्यों को मंडली-प्रस्तुतियों और सांस्कृतिक उत्सवों के ज़रिए आगे बढ़ाया। प्रशस्ति उन्हें दूरदर्शन शिलांग के लिए हिंदी नाटिका बनाने वाली खासी समुदाय की पहली महिला बताती है।
2024 के पद्म श्री ने उनकी संयुक्त पहचान, शिक्षिका, प्रशिक्षक और संस्कृति की रखवाली करने वाली, को राष्ट्रीय सम्मान दिया।
स्रोत
- पद्म पुरस्कार 2024: आधिकारिक प्रशस्ति
- PIB: मेघालय परिचय
- पद्म पुरस्कार 2024: अधिसूचना
- padmaawards.gov.in/Document/pdf/CitationsForTickets/2024/202495.pdf
- pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2020138
- padmaawards.gov.in/Document/pdf/notifications/PadmaAwards/2024.pdf