खेत ही प्रयोगशाला
श्रीरंग देवबा लाड, जिन्हें कई किसान “दादा लाड” कहते हैं, खेत में किए गए कृषि-प्रयोगों का उदाहरण हैं। आधिकारिक पद्म प्रशस्ति के अनुसार उनका जन्म 1 जनवरी 1947 को परभणी ज़िले के मालसोन्ना गाँव में हुआ।
कॉलेज की पढ़ाई के बाद उन्होंने लंबे समय तक ग्रामीण संगठनों और किसान नेटवर्क के साथ काम किया और खेती को व्यावहारिक शोध का क्षेत्र बनाया।
दादा लाड तकनीक
उनकी सबसे बड़ी पहचान कपास उगाने के एक तरीके से है। प्रशस्ति कहती है कि उनकी तकनीक ने पौधों की दूरी, पौध-प्रबंधन और अच्छी कृषि पद्धतियों के ज़रिए कपास की उत्पादकता में उल्लेखनीय सुधार दिखाया। इसी तरह उन्होंने ज्वार और तुअर पर भी प्रयोग किए।
प्रशस्ति में केंद्रीय कपास अनुसंधान संस्थान, नागपुर द्वारा उनकी तकनीकों के मूल्यांकन का उल्लेख है। 2026 के संसद टीवी साक्षात्कार में इस तकनीक को सघन रोपण, कम लागत, वैज्ञानिक फ़सल-प्रबंधन और टिकाऊ खेती के संदर्भ में समझाया गया।
किसान ही शोधकर्ता
वे देसी गोवंश और किसान प्रशिक्षण से भी जुड़े रहे। उनकी कहानी प्रयोगशाला और खेत के बीच की दूरी कम करती है।
नवाचार तब सबसे मज़बूत होता है जब किसान अवलोकन, प्रयोग और संस्थागत परख को साथ लाता है, और फिर किसान एक-दूसरे से सीखते हैं।
स्रोत
- पद्म पुरस्कार 2026: आधिकारिक प्रशस्ति
- संसद टीवी: साक्षात्कार
- पद्म पुरस्कार 2026: अधिसूचना
- padmaawards.gov.in/Document/pdf/CitationsForTickets/2026/English/2026115.pdf
- youtube.com/watch?v=KpcRYCrGJxg
- padmaawards.gov.in/Document/pdf/Notifications/PadmaAwards/PadmaAwards2026.pdf