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शांति स्वरूप भटनागर
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विज्ञान और नवाचार · दिल्ली

भारत की राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं के निर्माता

शांति स्वरूप भटनागर एक बेहतरीन रसायनज्ञ थे। भारत को उनकी बड़ी देन एक व्यवस्था थी: एक परिषद और राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं की श्रृंखला, जिनमें से हर एक देश की किसी असली समस्या पर काम करती थी।

शांति स्वरूप भटनागरShanti Swarup Bhatnagar
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1994 के भारतीय डाक टिकट पर शांति स्वरूप भटनागर। चित्र: इंडिया पोस्ट

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जन्म
21 फ़रवरी 1894, भेरा (अब पाकिस्तान)
निधन
1955
क्षेत्र
रसायन, औद्योगिक शोध, संस्था-निर्माण
संस्थान
CSIR; यूनिवर्सिटी केमिकल लेबोरेटरीज़, लाहौर
सम्मान
पद्म भूषण 1954; रॉयल सोसाइटी के फ़ेलो 1943
1943रॉयल सोसाइटी के फ़ेलो
1954पद्म भूषण

मक़सद वाला रसायन

शांति स्वरूप भटनागर का जन्म 21 फ़रवरी 1894 को भेरा में हुआ, जो आज पाकिस्तान में है। भारत और लंदन में रसायन की उच्च शिक्षा के बाद उन्होंने कोलॉइड रसायन, मैग्नेटोकेमिस्ट्री और औद्योगिक समस्याओं पर शोध किया।

उनकी ख़ासियत बुनियादी रसायन को उद्योग की व्यावहारिक चुनौतियों से जोड़ना थी।

प्रयोगशालाओं का नेटवर्क

आज़ादी से पहले बोर्ड ऑफ़ साइंटिफ़िक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च और फिर वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद के निर्माण में उन्होंने केंद्रीय भूमिका निभाई। CSIR के पहले महानिदेशक के रूप में उन्होंने राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं के नेटवर्क की सोच विकसित की: ईंधन, काँच, धातुकर्म, रसायन, खाद्य और दूसरे क्षेत्रों के लिए अलग-अलग संस्थान।

अकादमिक रसायनज्ञ से राष्ट्रीय विज्ञान प्रशासक बनना उनके जीवन का निर्णायक मोड़ था। उन्होंने देखा कि देश को अकेली प्रतिभा से ज़्यादा संस्थागत क्षमता चाहिए।

अनुप्रयुक्त विज्ञान की रीढ़

CSIR की प्रयोगशालाएँ स्वतंत्र भारत में अनुप्रयुक्त शोध, उद्योग को सहयोग और वैज्ञानिक जनशक्ति की रीढ़ बनीं। भारत का प्रतिष्ठित शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार उन्हीं के नाम पर है।

उनका करियर बताता है कि वैज्ञानिक नेतृत्व का एक रूप प्रयोगशालाएँ, टीमें और लंबे समय की फ़ंडिंग व्यवस्था बनाना भी है।

स्रोत