घर के पास की नदी
सतेंद्र सिंह लोहिया की कहानी शरीर की सीमाओं को नई दिशा देने की कहानी है। आधिकारिक पद्म प्रशस्ति के अनुसार उनका जन्म 6 जुलाई 1987 को मध्य प्रदेश के भिंड ज़िले के गाटा गाँव में हुआ। बचपन में एक बीमारी के बाद ग़लत इलाज से उनके दोनों पैरों की नसें प्रभावित हुईं और उन्हें लगभग 70% स्थायी लोकोमोटर दिव्यांगता हुई।
परिवार आर्थिक रूप से साधारण था, फिर भी उन्होंने पढ़ाई जारी रखी और गाँव की नदी में तैरना शुरू किया।
एक कोच, और खुला समुद्र
जीवन का मोड़ तब आया जब उनकी मुलाक़ात लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा संस्थान, ग्वालियर के तैराकी विभाग के पूर्व प्रमुख प्रो. वीरेंद्र कुमार डबास से हुई। दो वर्षों के कठिन प्रशिक्षण के बाद उन्होंने 2009 की राष्ट्रीय पैरालंपिक तैराकी चैंपियनशिप में पदक जीता।
इसके बाद खुले पानी की तैराकी उनकी पहचान बनी: 2017 में अरब सागर, 2018 में इंग्लिश चैनल पार, 2019 में कैटलिना चैनल रिले, 2022 में नॉर्थ चैनल और 2023 में इंग्लिश चैनल का दो-तरफ़ा रिले। हर अभियान ने पैरा-तैराकी को राष्ट्रीय चर्चा में लाया।
पदक, और एक संदेश
उनकी प्रशस्ति 11 राष्ट्रीय पैरालंपिक चैंपियनशिप में 23 पदकों और कई अंतरराष्ट्रीय पदकों का उल्लेख करती है। उन्होंने कन्याकुमारी से लाल चौक तक 4,320 किमी की दिव्यांग सशक्तिकरण खेलो यात्रा भी की, ताकि पैरा-खेलों और दिव्यांगजनों के लिए उपलब्ध सरकारी सुविधाओं के बारे में जागरूकता बढ़े।
उनका योगदान पदकों से आगे जाता है: उन्होंने दिव्यांगता को सार्वजनिक दृश्यता, साहसिक खेल और सामाजिक संदेश से जोड़ा। उनका जीवन बताता है कि पुनर्वास का अर्थ केवल सीमा संभालना नहीं, नई क्षमता पहचानना भी हो सकता है।
स्रोत
- पद्म पुरस्कार 2024: आधिकारिक प्रशस्ति
- MyGov: परिचय वीडियो
- पद्म पुरस्कार 2024: अधिसूचना
- padmaawards.gov.in/Document/pdf/CitationsForTickets/2024/202468.pdf
- youtube.com/watch?v=LMKtIWmM2HE
- padmaawards.gov.in/Document/pdf/notifications/PadmaAwards/2024.pdf