तेरह की उम्र में हलवाहा
सर्वेश्वर बसुमतारी की कहानी गरीबी और सीमित पढ़ाई से विविध खेती तक की है। आधिकारिक पद्म प्रशस्ति के अनुसार उनका जन्म 8 अप्रैल 1962 को हुआ और उन्होंने केवल पाँचवीं कक्षा तक पढ़ाई की।
13 वर्ष की उम्र में वे बोकाखात–धनसिरीमुख क्षेत्र में हलवाहे का काम करने गए। 1984 में लौटकर उन्होंने खेती शुरू की, पहले दूसरों की ज़मीन पर।
मोड़
1995–96 में अपनी ज़मीन ख़रीदने के बाद 1996 में बिजनी उप-मंडल कृषि कार्यालय का प्रशिक्षण उनके लिए मोड़ बना। पानबाड़ी केला उत्पादक समिति से जुड़कर उन्होंने केला, संतरा और अनानास का उत्पादन बढ़ाया।
बाद में उन्होंने मत्स्य प्रशिक्षण लिया, दूसरे राज्यों के अध्ययन-दौरे किए और बागवानी का प्रशिक्षण भी लिया। उनका खेत अब फ़सल-विविधता को मत्स्यपालन, बागवानी और रेशम-पालन से जोड़ता है।
सलाह देने वाला किसान
वे चिरांग ज़िले के मत्स्य विभाग सलाहकार बोर्ड, कृषि विज्ञान केंद्र और रेशम-पालन से जुड़े निकायों के सदस्य रहे, और बोरदोसिला फ़ार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के प्रमोटर के रूप में काम किया।
उनकी यात्रा दिखाती है कि किसान केवल योजनाओं का लाभार्थी नहीं, सलाहकार, संगठक और साथी किसानों का शिक्षक भी बन सकता है। 2024 का पद्म श्री इसी ज़मीनी कृषि नेतृत्व का सम्मान है।
स्रोत
- पद्म पुरस्कार 2024: आधिकारिक प्रशस्ति
- PIB: परिचय और अलंकरण
- ICAR-ATARI गुवाहाटी: पुरस्कार संदर्भ
- padmaawards.gov.in/Document/pdf/CitationsForTickets/2024/202431.pdf
- pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2018505&lang=2®=48
- icaratariguwahati.org.in/award-assam