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कृषि · असम

हलवाहे से कृषि सलाहकार तक

13 साल की उम्र में सर्वेश्वर बसुमतारी दूसरों के खेत जोत रहे थे। प्रशिक्षण, अभ्यास और किसानों के नेटवर्क ने उन्हें फल, मछली और रेशम उगाने वाला किसान और अपने ज़िले के कृषि निकायों का सलाहकार बना दिया।

सर्बेश्वर बसुमतारीSarbeswar Basumatary
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AI आवाज़ में सुनाई गई
जन्म
8 अप्रैल 1962
ज़िला
चिरांग, असम
क्षेत्र
विविध खेती, बागवानी, मत्स्यपालन, किसान संगठन
सम्मान
असम गौरव; कई किसान पुरस्कार; पद्म श्री 2024
13वर्ष की उम्र में हलवाहे का काम
1996वह प्रशिक्षण जिसने राह बदली
2024पद्म श्री

तेरह की उम्र में हलवाहा

सर्वेश्वर बसुमतारी की कहानी गरीबी और सीमित पढ़ाई से विविध खेती तक की है। आधिकारिक पद्म प्रशस्ति के अनुसार उनका जन्म 8 अप्रैल 1962 को हुआ और उन्होंने केवल पाँचवीं कक्षा तक पढ़ाई की।

13 वर्ष की उम्र में वे बोकाखात–धनसिरीमुख क्षेत्र में हलवाहे का काम करने गए। 1984 में लौटकर उन्होंने खेती शुरू की, पहले दूसरों की ज़मीन पर।

मोड़

1995–96 में अपनी ज़मीन ख़रीदने के बाद 1996 में बिजनी उप-मंडल कृषि कार्यालय का प्रशिक्षण उनके लिए मोड़ बना। पानबाड़ी केला उत्पादक समिति से जुड़कर उन्होंने केला, संतरा और अनानास का उत्पादन बढ़ाया।

बाद में उन्होंने मत्स्य प्रशिक्षण लिया, दूसरे राज्यों के अध्ययन-दौरे किए और बागवानी का प्रशिक्षण भी लिया। उनका खेत अब फ़सल-विविधता को मत्स्यपालन, बागवानी और रेशम-पालन से जोड़ता है।

सलाह देने वाला किसान

वे चिरांग ज़िले के मत्स्य विभाग सलाहकार बोर्ड, कृषि विज्ञान केंद्र और रेशम-पालन से जुड़े निकायों के सदस्य रहे, और बोरदोसिला फ़ार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के प्रमोटर के रूप में काम किया।

उनकी यात्रा दिखाती है कि किसान केवल योजनाओं का लाभार्थी नहीं, सलाहकार, संगठक और साथी किसानों का शिक्षक भी बन सकता है। 2024 का पद्म श्री इसी ज़मीनी कृषि नेतृत्व का सम्मान है।

स्रोत