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सानो वामुज़ो
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समाज सेवा · नागालैंड

शांति की आवाज़ बनी एक शिक्षिका

सानो वामुज़ो पहले एक स्कूल शिक्षिका थीं। जब हिंसा ने नागालैंड को झकझोरा, उन्होंने माँओं की नैतिक आवाज़ को एक सार्वजनिक अभियान में बदलने में मदद की, जिसकी माँग सीधी थी: अब और ख़ून नहीं।

सानो वामुज़ोSano Vamuzo
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सानो वामुज़ो। फ़ोटो: इंडिया टुडे NE के माध्यम से

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AI आवाज़ में सुनाई गई
जन्म
27 मार्च 1940
ज़िला
फेक, नागालैंड
क्षेत्र
महिला सशक्तिकरण, शांति-निर्माण, शिक्षा
सम्मान
पद्म श्री 2024
1984नागा मदर्स एसोसिएशन की संस्थापक अध्यक्ष
2007राज्य महिला आयोग की पहली अध्यक्ष
2024पद्म श्री

पहले एक शिक्षिका

सानो वामुज़ो की सार्वजनिक यात्रा शिक्षा और महिलाओं के नेतृत्व में शांति-निर्माण को जोड़ती है। आधिकारिक पद्म प्रशस्ति के अनुसार उनका जन्म 27 मार्च 1940 को फेक, नागालैंड में हुआ। उन्होंने गुवाहाटी विश्वविद्यालय से BA, बॉम्बे विश्वविद्यालय से B.Ed. और NEHU से शिक्षा में MA किया।

उन्होंने कई स्कूलों में पढ़ाया, चोज़ुबा के मिशन इंग्लिश स्कूल (अब ईस्टर्न क्रिश्चियन स्कूल) की शुरुआत में मदद की और उसकी पहली प्रधानाध्यापिका रहीं।

शेड नो मोर ब्लड

1984 में वे नागा मदर्स एसोसिएशन (NMA) की संस्थापक अध्यक्ष बनीं। NMA ने महिला अधिकार, नशा और शराब, स्वास्थ्य, शिक्षा, आर्थिक शोषण और वनों की कटाई जैसे मुद्दों पर सामाजिक कार्रवाई को मज़बूत किया।

गुटीय हिंसा के दौर में NMA की शांति पहल “शेड नो मोर ब्लड” सबसे अहम रही। महिलाओं के नेतृत्व वाले नागरिक समाज ने हिंसा के बीच संवाद और जीवन-रक्षा की नैतिक आवाज़ बनने की कोशिश की।

महिलाओं के लिए संस्थाएँ

2007 में वे नागालैंड राज्य महिला आयोग की पहली अध्यक्ष बनीं और दो कार्यकाल तक सेवा दी। NMA ने महिलाओं के प्रतिनिधित्व और शहरी स्थानीय निकायों में आरक्षण जैसे मुद्दों पर भी काम किया।

2024 का पद्म श्री उन्हें केवल “समाजसेवी” नहीं, बल्कि शिक्षिका, संस्था-निर्माता और शांति की पैरोकार के रूप में देखने का अवसर देता है।

स्रोत