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संजय अनंत पाटिल
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कृषि · गोवा

ढलान से सिंचाई करने वाले किसान

संजय अनंत पाटिल ने गोवा की एक बंजर ढलान को लंबे प्रयोग की तरह देखा। प्राकृतिक खेती और ढलान से बहते पानी के सहारे लगभग दस एकड़ ज़मीन एक चलता-फिरता खेत बन गई, और वैज्ञानिक यह दर्ज करने आए कि उन्होंने यह कैसे किया।

संजय अनंत पाटिलSanjay Anant Patil
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संजय अनंत पाटिल। फ़ोटो: ICAR-CCARI के माध्यम से

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राज्य
गोवा
पढ़ाई
11वीं कक्षा तक
क्षेत्र
प्राकृतिक खेती और ज़ीरो-एनर्जी माइक्रो-सिंचाई
सम्मान
गोवा कृषि रत्न; IARI नवोन्मेषी किसान पुरस्कार; पद्म श्री 2024
~10एकड़ कभी बंजर ज़मीन
2024पद्म श्री

बंजर ज़मीन, एक प्रयोग

संजय अनंत पाटिल की कहानी दिखाती है कि खेती में नवाचार हमेशा प्रयोगशाला से नहीं आता। PIB और ICAR-CCARI उन्हें गोवा का नवोन्मेषी कुलागर किसान बताते हैं, जिसने लगभग दस एकड़ बंजर ज़मीन को प्राकृतिक खेती और ज़ीरो-एनर्जी माइक्रो-सिंचाई से उत्पादक एकीकृत खेत में बदला।

उन्होंने 11वीं कक्षा तक औपचारिक पढ़ाई की, लेकिन जल-संरक्षण और खेत-इंजीनियरिंग में ज़मीनी अनुभव से विशेषज्ञता बनाई।

कुलागर मॉडल

उनका कुलागर मॉडल बागान और पशुपालन को जोड़ता है। ICAR-CCARI के तकनीकी मार्गदर्शन के साथ उन्होंने सुपारी, नारियल, काजू, अनानास और दूसरी फ़सलों को प्राकृतिक खेती के सिद्धांतों के तहत एक साथ उगाया।

जीवामृत जैसे इनपुट और ढलान पर आधारित, ज़ीरो-एनर्जी सिंचाई उनकी पहचान बने।

किसान और वैज्ञानिक साथ

ICAR-CCARI ने उनकी तकनीकों का दस्तावेज़ीकरण किया और पद्म नामांकन में सहयोग दिया। वे राज्य और राष्ट्रीय किसान मंचों पर अपना ज्ञान साझा करते रहे हैं।

2024 के पद्म श्री ने उनकी मेहनत के साथ एक बड़े विचार को भी पहचाना: छोटे और प्रगतिशील किसान स्थानीय इंजीनियरिंग और प्राकृतिक व्यवस्थाओं को मिलाकर जलवायु, पानी और लागत की चुनौतियों के हल खोज सकते हैं।

स्रोत