पैसा नहीं, बस संकल्प
सांगथनकिमा की कहानी औपचारिक शिक्षा से ज़्यादा करुणा और संस्था-निर्माण की है। आधिकारिक पद्म प्रशस्ति के अनुसार उनका जन्म 18 अक्टूबर 1958 को हुआ और वे केवल पाँचवीं कक्षा तक पढ़ सके।
फिर भी 1988 में उन्होंने चम्फाई से थुताक नुनपुइतु टीम (TNT) की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य अनाथों, बेसहारा लोगों, नशे से जूझ रहे लोगों और मानसिक रूप से बीमार लोगों को आश्रय और पुनर्वास देना था। प्रशस्ति बताती है कि शुरुआत में उनके पास कोई पूँजी नहीं थी; उन्होंने और साथियों ने मज़दूरी करके संसाधन जुटाए।
कई कमरों वाला घर
समय के साथ TNT ने आइज़ोल, लुंगलेई, कोलासिब, चम्फाई और म्यांमार के तहान तक घर चलाए। सरकारी प्रशस्ति उस समय उसके बाल गृह, मानसिक स्वास्थ्य गृह और नशा-मुक्ति केंद्रों में 3,535 मरीज़ों और निवासियों का आँकड़ा देती है।
यह एक तय समय की तस्वीर है, जीवन भर का कुल नहीं।
देखभाल को ढाँचा
TNT को 2013 में राष्ट्रीय बाल पुरस्कार मिला और सांगथनकिमा को क्षेत्रीय और राष्ट्रीय सम्मान मिले। 2024 के पद्म श्री ने ऐसे ज़मीनी संस्था-निर्माता को राष्ट्रीय पहचान दी जिसने नशा, मानसिक बीमारी, अनाथपन और बेसहारापन जैसी अलग-अलग ज़रूरतों को देखभाल के एक ही नेटवर्क में संभालने की कोशिश की।
स्रोत
- भारत के राष्ट्रपति: पद्म पुरस्कार 2024 प्रशस्तियाँ
- PIB: पद्म पुरस्कार 2024 सूची
- इंडिया टुडे NE: परिचय
- presidentofindia.gov.in/sites/default/files/2024-05/padma_awardees_citation_compressed.pdf
- pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=1999790&lang=2®=48
- indiatodayne.in/mizoram/story/mizoram-social-worker-sangthankima-honoured-with-padma-shri-1003163-2024-05-10