स्कूल के मंच पर मिली एक किताब
स्कूल के दिनों में सुशीलम्मा एक बार दान में मिली किताब लेने मंच पर गईं। 2026 के इंडियन एक्सप्रेस फ़ीचर में वे याद करती हैं कि उसी पल उन्होंने तय किया था कि एक दिन वे देने वालों में होंगी। दशकों बाद वही इच्छा बच्चों, महिलाओं और बुज़ुर्गों के लिए संस्थाओं में बदल गई।
₹15 से शुरू हुई संस्था
स्वतंत्र रिपोर्टों में वे बताती हैं कि 1975 में तीन बच्चों को देखभाल की ज़रूरत थी, और यहीं से सुमंगली सेवा आश्रम शुरू हुआ, सिर्फ़ ₹15 की शुरुआती रक़म के साथ। आधिकारिक पद्म प्रशस्ति 1975 में स्थापना की पुष्टि करती है। समय के साथ यह सहारे की एक पूरी व्यवस्था बन गया।
एक छत के नीचे कई तरह की मदद
आधिकारिक प्रशस्ति में अनाथ और बेसहारा लड़कियों के लिए प्रेमानंद मक्कल कुटीर, बसवानंद उच्च प्राथमिक विद्यालय, बालिका हाई स्कूल, कणमणि किंडरगार्टन, संकट में फँसी महिलाओं के लिए सौहार्द अल्प-आवास, बुज़ुर्ग महिलाओं के लिए पुण्यकोटि वानप्रस्थाश्रम, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और मुफ़्त पॉलीक्लिनिक दर्ज हैं। उनका मॉडल सिर्फ़ आश्रय नहीं है: यह शिक्षा, स्वास्थ्य, परामर्श, पुनर्वास और रोज़गार को जोड़ता है।
उन्होंने प्रौढ़ साक्षरता, स्वयं सहायता समूहों, महिला मंडलों, व्यावसायिक प्रशिक्षण, छोटे कारोबार, सूक्ष्म ऋण और पंचायतों में महिला नेतृत्व पर भी काम किया है। प्रशस्ति इरुलिगा और कुरुबा समुदायों के साथ रोज़गार और टिकाऊ खेती के कार्यक्रमों का भी उल्लेख करती है।
समाज सेवा से पेड़ लगाने तक
उनका वृक्षमहादासोह अभियान समाज सेवा को पर्यावरण की ज़िम्मेदारी से जोड़ता है। पद्म प्रशस्ति के अनुसार इसके तहत कर्नाटक में 40 लाख से ज़्यादा पौधे लगाए गए हैं।
उनका जीवन बताता है कि सेवा एक बार के दान के बजाय टिकाऊ संस्था बन सकती है, और लगभग शून्य से शुरू हुआ काम दशकों में बड़ा हो सकता है।
स्रोत
- पद्म पुरस्कार 2026: आधिकारिक प्रशस्ति
- PIB: कर्नाटक के पद्म पुरस्कार विजेता 2026
- सुमंगली सेवा आश्रम: आधिकारिक वेबसाइट
- द इंडियन एक्सप्रेस (2026): '₹15 से सेवा के जीवन तक'
- द न्यू इंडियन एक्सप्रेस (2013): 'उम्मीद का दरवाज़ा'
- static.pib.gov.in/WriteReadData/specificdocs/documents/2026/may/doc2026525876101.pdf
- pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2262338&lang=1®=20
- sumangalisevaashrama.org/sumangali-seva-ashrama.php
- indianexpress.com/article/cities/bangalore/unsung-heroes-from-%E2%82%B915-to-life-of-service-meet-s-g-susheelamma-the-mother-teresa-of-karnataka-and-2026-padma-shri-awardee-10545484/
- newindianexpress.com/cities/bengaluru/2013/jan/14/a-gateway-of-hope-for-the-unfortunate-443060.html