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ऋतु करिधल
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विज्ञान और नवाचार · उत्तर प्रदेश

मंगल तक का रास्ता तय करने वाली

मंगलयान के पास कम ईंधन, कम बिजली और कम समय था। ऋतु करिधल उन ऑपरेशंस लीडरों में थीं जिन्होंने तय किया कि वह वहाँ कैसे पहुँचेगा।

ऋतु करिधलRitu Karidhal
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ऋतु करिधल। फ़ोटो: अभिलेखीय चित्र; श्रेय की पुष्टि जारी

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AI आवाज़ में सुनाई गई
जन्म
लखनऊ, उत्तर प्रदेश
क्षेत्र
अंतरिक्ष यान मिशन डिज़ाइन, ग्रह अन्वेषण
संस्थान
ISRO
मिशन भूमिका
डिप्टी ऑपरेशंस डायरेक्टर, मार्स ऑर्बिटर मिशन
बाद में
चंद्रयान में वरिष्ठ ज़िम्मेदारियाँ
2014मंगलयान मंगल की कक्षा में

लखनऊ से ISRO तक

ऋतु करिधल का जन्म लखनऊ में हुआ। भौतिकी की पढ़ाई और IISc में एयरोस्पेस से जुड़ी उच्च शिक्षा के बाद वे ISRO से जुड़ीं।

उन्होंने उपग्रह मिशन योजना, अंतरिक्ष यान की स्वायत्तता और संचालन में लंबा अनुभव बनाया।

मंगलयान

मार्स ऑर्बिटर मिशन में वे डिप्टी ऑपरेशंस डायरेक्टर जैसी अहम भूमिका में रहीं। चुनौती थी सीमित वज़न, बिजली और पैसे में, कसे हुए समय के भीतर, एक अंतरग्रहीय यान को मंगल की कक्षा तक ले जाना।

पृथ्वी की कक्षा वाले यानों से अंतरग्रहीय संचालन तक जाना तकनीकी जटिलता की बड़ी छलांग थी। अंतरिक्ष मिशनों में भरोसा छोटी-छोटी बारीकियों, सिमुलेशन और टीमों के बीच तालमेल से बनता है।

चंद्र मिशन और नई पीढ़ी

बाद में उन्होंने चंद्रयान कार्यक्रम में भी वरिष्ठ मिशन ज़िम्मेदारियाँ निभाईं।

मंगलयान ने भारत की गहन-अंतरिक्ष क्षमता दिखाई और दुनिया भर में ISRO की साख बढ़ाई। उनकी पहचान ने भारत के बहुत से युवा विद्यार्थियों की यह सोच बदली है कि वे क्या बन सकते हैं।

स्रोत