बचपन की एक चोट
डॉ. प्रेमा धनराज की कहानी निजी अनुभव को चिकित्सा में बदलने के सबसे सशक्त उदाहरणों में से एक है। सरकारी और स्वतंत्र परिचयों के अनुसार आठ साल की उम्र में घर में लगी आग में वे बुरी तरह झुलस गई थीं। CMC वेल्लोर में कई पुनर्निर्माण ऑपरेशनों ने उनकी जान बचाई, और बाद में उन्होंने उसी क्षेत्र को अपना पेशा बनाया।
सर्जन बनना
आधिकारिक पद्म प्रशस्ति के अनुसार उन्होंने BSc (1974), MBBS (1980), MS (1986) और प्लास्टिक सर्जरी में MCh (1988) किया। 1980 से 2010 तक उन्होंने CMC वेल्लोर में अलग-अलग भूमिकाओं में काम किया और 1998 में प्लास्टिक सर्जरी विभाग की प्रमुख बनीं, और वहाँ के बर्न यूनिट व MCh प्रशिक्षण कार्यक्रम के विकास में अहम भूमिका निभाई।
अग्नि रक्षा
1999 में उन्होंने ‘अग्नि रक्षा’ की स्थापना की, ताकि ग़रीब परिवारों के जले हुए लोगों, ख़ासकर महिलाओं और बच्चों, को पुनर्निर्माण उपचार, पुनर्वास, हुनर और समाज में लौटने में मदद मिल सके। बाद में वे बेंगलुरु में चिकित्सा शिक्षण और सर्जरी से भी जुड़ी रहीं।
उनकी कहानी का केंद्र ‘पीड़ित से डॉक्टर’ वाली नाटकीय पंक्ति नहीं, लंबी पेशेवर दक्षता है। बचपन के आघात ने दिशा दी; वर्षों के प्रशिक्षण, सर्जरी, अध्यापन और पुनर्वास के काम ने उसे टिकाऊ योगदान बनाया। जलने का इलाज सर्जरी के साथ ख़त्म नहीं होता।
स्रोत
- पद्म पुरस्कार 2024: आधिकारिक प्रशस्ति
- अग्नि रक्षा: आधिकारिक वेबसाइट
- द इंडियन एक्सप्रेस: झुलसने से बचीं, बनीं प्लास्टिक सर्जन
- padmaawards.gov.in/Document/pdf/CitationsForTickets/2024/202450.pdf
- agniraksha.org/
- indianexpress.com/article/cities/bangalore/padma-shri-prema-dhanraj-burns-survivor-plastic-surgeon-9134053/
- ndtv.com/video/looks-don-t-matter-life-is-precious-padmashri-awardee-dr-prema-dhanraj-756739