मंच पर एक स्कूली छात्रा
पोखिला लेकथेपी का संगीत सफ़र बहुत कम उम्र में शुरू हुआ। आधिकारिक 2026 पद्म प्रशस्ति के अनुसार उनका जन्म 21 अगस्त 1962 को कार्बी आंगलोंग के डोकमोका में डोपोर टिमुंग गाँव में हुआ। स्कूल के दिनों से ही उन्हें गाने का शौक़ था और परिवार ने इसे बढ़ावा दिया।
1974 में उन्होंने पहले कार्बी युवा महोत्सव में भाग लिया और आधुनिक व लोकगीत, दोनों श्रेणियों में पुरस्कार जीते। 1975 में उन्होंने अपने गीत और बोल रचने शुरू किए, और 1976 में अपनी रचना के लिए प्रथम पुरस्कार जीता।
रेडियो और टीवी
उनकी आवाज़ 1978 में ऑल इंडिया रेडियो गुवाहाटी और 1984 में दूरदर्शन गुवाहाटी तक पहुँची। इसके बाद दशकों तक वे इस बात का हिस्सा रहीं कि कार्बी गीत और कार्बी भाषा सार्वजनिक रूप से कैसे सुनी जाती है। क्षेत्रीय भाषा की गायिका सिर्फ़ कलाकार नहीं होती; वह समुदाय की बोली, भाव और स्मृति को ध्वनि-संग्रह में बदल देती है।
स्थानीय मंच से राष्ट्रीय सम्मान तक
सर्वश्रेष्ठ गायिका पुरस्कार, क्षेत्रीय सम्मान, 2024 का असम गौरव और अंततः 2026 का पद्म श्री उनके काम की पहचान बने। फिर भी उनके करियर का विस्तृत रिकॉर्ड अभी भी असम और कार्बी स्रोतों में बिखरा हुआ है।
छोटे सामुदायिक उत्सव राष्ट्रीय कलाकारों की पाठशाला बन सकते हैं, और क्षेत्रीय भाषाओं का संगीत सांस्कृतिक स्मृति का अनमोल संग्रह है।
स्रोत
- PIB / पद्म पुरस्कार 2026: आधिकारिक प्रशस्तियाँ
- पद्म पुरस्कार 2026: अधिसूचना
- द सेंटिनल असम: परिचय
- static.pib.gov.in/WriteReadData/specificdocs/documents/2026/jun/doc2026623901101.pdf
- padmaawards.gov.in/Document/pdf/Notifications/PadmaAwards/PadmaAwards2026.pdf
- sentinelassam.com/north-east-india-news/assam-news/assam-pakhila-lekhthepi-inaugurates-competition-at-nagaon-university