संगीत में जन्म
डॉ. पी. दत्तनामूर्ति दक्षिण भारत की उस परंपरा के प्रतिनिधि हैं जिसमें थविल और नादस्वरम एक-दूसरे को पूरा करते हैं। आधिकारिक पद्म प्रशस्ति के अनुसार उनका जन्म 21 दिसंबर 1956 को पुदुच्चेरी में हुआ। उनके पिता आर. पूवन जाने-माने नादस्वरम विद्वान थे, और उसी संगीतमय घर में उन्होंने लगभग 15 साल की उम्र से थविल सीखना शुरू किया।
हज़ारों मंदिर और समारोह
थविल सिर्फ़ मंच का वाद्य नहीं; यह मंदिर उत्सवों, शादियों और पारंपरिक समारोहों की आवाज़ का हिस्सा है। प्रशस्ति के अनुसार उन्होंने 5,000 से ज़्यादा मंदिरों, 8,000 से ज़्यादा पारंपरिक और पारिवारिक समारोहों, और 2006 के बाद 3,000 से ज़्यादा सरकारी सांस्कृतिक कार्यक्रमों में प्रस्तुति दी है।
कला का सम्मान
संगत देने वाले कलाकार अक्सर मुख्य कलाकारों से कम दिखते हैं। उन्होंने दशकों तक थविल को लगातार मंच दिया, और पुदुच्चेरी कलैमामणि (2009), कांची कामकोटि पीठम के आस्थान विद्वान (2014) और कई दूसरी उपाधियों से सम्मानित हुए।
2025 में पद्म श्री की घोषणा पर उन्होंने इसे निजी जीत नहीं, पारंपरिक कला का सम्मान कहा। संगत की कलाएँ सांस्कृतिक विरासत की रीढ़ हैं।
स्रोत
- पद्म पुरस्कार 2025: आधिकारिक प्रशस्ति
- पुदुच्चेरी कला एवं संस्कृति: कलैमामणि सूची
- PTI / DT नेक्स्ट: परिचय
- padmaawards.gov.in/Document/pdf/CitationsForTickets/2025/202596.pdf
- art.py.gov.in/indigent-artistes-and-kalaimamani-list
- dtnext.in/news/tamilnadu/padma-shri-vibrant-recognition-of-art-says-puducherry-thavil-artiste-820586
- x.com/airnews_puduvai/status/1883194147219316778