एक परिवार का अनुभव
नीलेश विनोदचंद्र मंडलेवाला का सफ़र किसी पुरस्कार या संस्था से नहीं, अपने परिवार की बीमारी से शुरू हुआ। 2026 की पद्म प्रशस्ति के अनुसार उनके पिता की किडनी ख़राब हो गई और 2004 से उन्हें हफ़्ते में दो बार डायलिसिस की ज़रूरत पड़ने लगी। इस अनुभव ने उन्हें अंगों के ख़राब होने और दान किए गए अंगों की कमी के पीछे की असली मानवीय पीड़ा के क़रीब ला दिया।
सूरत, 2006
लगभग 2005 में उन्होंने कैडेवर अंगदान, यानी ब्रेन-डेथ के बाद अंगदान, की जागरूकता पर काम शुरू किया। जनवरी 2006 में सूरत से गुजरात का पहला अंतर-शहरी कैडेवर किडनी दान संभव कराने में उनकी भूमिका दर्ज है। वर्षों के साथ यह अभियान लिवर, हृदय, फेफड़े, अग्न्याशय, कॉर्निया, हाथ और दूसरे ऊतकों तक बढ़ा, और 2014 में डोनेट लाइफ़ ट्रस्ट की औपचारिक स्थापना हुई।
भाषणों से कहीं आगे
उनका काम जागरूकता भाषणों से कहीं आगे जाता है। डोनेट लाइफ़ के अनुसार उनकी टीम ब्रेन-डेड दाताओं के परिवारों को संवेदनशील परामर्श, चिकित्सा-क़ानूनी तालमेल, पुलिस मंज़ूरी, परिवहन और दान के बाद दाता परिवारों के सहारे में मदद करती है।
उन्होंने अपने पिता के दर्द को दूसरे परिवारों को प्रत्यारोपण का मौक़ा दिलाने के मिशन में बदल दिया। अंगदान में चिकित्सा तकनीक जितना ही ज़रूरी जनता का भरोसा और सहमति है।
स्रोत
- PIB / पद्म पुरस्कार 2026: आधिकारिक प्रशस्ति
- डोनेट लाइफ़: संस्थापक परिचय
- संसद टीवी: साक्षात्कार
- static.pib.gov.in/WriteReadData/specificdocs/documents/2026/may/doc2026525876101.pdf
- donatelife.org.in/founder/
- sansadtv.nic.in/episode/samvaad-%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%AE-26-may-2026