मोगा से लंदन
नरिंदर सिंह कपानी का जन्म 31 अक्टूबर 1926 को मोगा, पंजाब में हुआ। आगरा विश्वविद्यालय से पढ़ाई के बाद वे प्रकाशिकी शोध के लिए इंपीरियल कॉलेज लंदन गए।
भारत से ब्रिटेन, और बाद में अमेरिका की यात्रा उन्हें एक उभरते क्षेत्र के केंद्र तक ले गई।
काँच से गुज़रती तस्वीरें
इंपीरियल कॉलेज में हेरोल्ड हॉपकिंस के साथ उन्होंने काँच के रेशों के लचीले गुच्छों से तस्वीरें भेजने पर अग्रणी प्रयोग किए। पतले काँच के रेशे में घुसा प्रकाश भीतर ही भीतर परावर्तित होता रहता है, इसलिए वह मोड़ पर भी रेशे के साथ चलता है।
1950 के दशक में उन्होंने “फ़ाइबर ऑप्टिक्स” शब्द को लोकप्रिय बनाया और ऑप्टिकल-फ़ाइबर इमेजिंग व संचार विज्ञान के शुरुआती वैचारिक और प्रायोगिक विकास में प्रमुख भूमिका निभाई। सुसंगत फ़ाइबर गुच्छे और प्रकाश से तस्वीरें भेजना उनके मुख्य योगदान हैं।
शोध से उद्यम तक, और आगे
बाद में उन्होंने अमेरिका में अकादमिक और उद्यमी करियर बनाया, ऑप्टिकल तकनीक की कंपनियाँ स्थापित कीं, और सिख कला व परोपकार में सक्रिय रहे। शोध को उद्यम में बदलना उनके जीवन का दूसरा बड़ा मोड़ था।
2020 में उनका निधन हुआ और 2021 में उन्हें मरणोपरांत पद्म विभूषण मिला। नए क्षेत्र अक्सर कई योगदानकर्ताओं से बनते हैं, और इतिहास में श्रेय सोच-समझकर दिया जाना चाहिए।
स्रोत
- UC सांता क्रूज़: नरिंदर कपानी श्रद्धांजलि
- ऑप्टिका (द ऑप्टिकल सोसाइटी)
- पद्म पुरस्कार
- news.ucsc.edu/2020/12/narinder-kapany-in-memoriam/
- optica.org/
- padmaawards.gov.in/