तरल पर दाँव
एस. नंबी नारायणन का जन्म 12 दिसंबर 1941 को नागरकोइल, तमिलनाडु में हुआ। ISRO के शुरुआती दशकों में ठोस प्रणोदन हावी था, लेकिन उन्होंने तरल प्रणोदन के रणनीतिक महत्व को पहचाना।
वे फ़्रांस में प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग से जुड़े रहे, और तरल-प्रणोदन तकनीक को हासिल करने, अपनाने और उसके इर्द-गिर्द संस्थागत क्षमता बनाने में अहम योगदान दिया।
विकास
विकास इंजन तंत्र के विकास में उन्होंने वरिष्ठ तकनीकी भूमिका निभाई। यह इंजन परिवार बाद में PSLV और GSLV के चरणों का मुख्य आधार बना।
तरल इंजनों ने भारत के प्रक्षेपण यानों की वहन क्षमता और लचीलेपन को बहुत बढ़ाया। इंजन का विकास टीम की प्रक्रिया थी, और तकनीकी श्रेय उसी टीम के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
1994 और उसके बाद
1994 में उन्हें एक जासूसी मामले में गिरफ़्तार किया गया। CBI जाँच और सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही के बाद आरोप निराधार पाए गए, और उन्हें मुआवज़ा व राहत मिली। इस मामले ने उनके वैज्ञानिक करियर और निजी जीवन पर गंभीर असर डाला, और बाद के न्यायिक निष्कर्षों ने उनके साथ हुए अन्याय को माना।
वैज्ञानिक संस्थानों में उचित प्रक्रिया और व्यक्ति के अधिकार उतने ही ज़रूरी हैं जितने तकनीकी लक्ष्य।
स्रोत
- PIB: नंबी नारायणन प्रोफ़ाइल और फ़िल्म संदर्भ
- ISRO
- भारत का सर्वोच्च न्यायालय
- pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=1837273&lang=2®=48
- isro.gov.in/
- sci.gov.in/