सिलक्यारा के सत्रह दिन
मुन्ना कुरैशी की कहानी नवंबर 2023 के सिलक्यारा सुरंग बचाव से जुड़ी है, जब 41 मज़दूर 17 दिनों तक फँसे रहे। आख़िरी चरण में भारी ऑगर ड्रिलिंग मशीन के विफल होने के बाद, एक संकरे पाइप के भीतर हाथ से खुदाई के लिए अनुभवी रैट-होल खनिकों की टीम लगाई गई।
हाथों से, पाइप के भीतर
स्वतंत्र रिपोर्टिंग के अनुसार कुरैशी उस टीम के प्रमुख सदस्यों में थे। हिंदुस्तान टाइम्स ने उस समय उनकी उम्र लगभग 29 वर्ष बताई और लिखा कि टीम को लगभग 2.6 फ़ुट चौड़े पाइप के भीतर हाथ से मलबा हटाना पड़ा। आख़िरी हिस्सा, जो हाथ से खोदा गया, लगभग 12 मीटर बताया गया है।
स्रोत टीम के लगातार काम को लगभग 24 से 26 घंटे बताते हैं। कई रिपोर्टें कुरैशी को फँसे मज़दूरों तक शारीरिक रूप से पहुँचने वाला पहला खनिक कहती हैं, और मज़दूरों का उन्हें गले लगाना इस बचाव के मानवीय पहलू का प्रतीक बन गया।
सबसे ऊँची श्रेणी
25 जनवरी 2025 को घोषित जीवन रक्षा पदक 2024 सूची में भारत सरकार ने मुन्ना कुरैशी को सर्वोत्तम जीवन रक्षा पदक के लिए चुना। छोटे परिचयों में सिर्फ़ ‘जीवन रक्षा पदक’ लिखा हो सकता है, लेकिन आधिकारिक सूची सबसे ऊँची श्रेणी, सर्वोत्तम, दर्ज करती है।
किसी जटिल बचाव में तकनीक और कुशल हाथ का काम, दोनों ज़रूरी हो सकते हैं। और टीम का प्रयास हमेशा व्यक्तिगत गौरव से पहले आना चाहिए।
स्रोत
- PIB: जीवन रक्षा पदक 2024
- हिंदुस्तान टाइम्स: रैट-होल खनिक मुन्ना कुरैशी कौन हैं
- हिंदुस्तान टाइम्स: रैट माइनिंग से पूरा हुआ काम
- दैनिक जागरण: निजी कहानी
- आज तक: साक्षात्कार
- pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2096171&lang=2®=48
- hindustantimes.com/india-news/uttarakhand-tunnel-rescue-who-is-rat-hole-miner-munna-qureshi-hailed-as-operations-hero-101701218204918.html
- hindustantimes.com/india-news/ratmining-gets-job-done-101701197972304.html
- aajtak.in/india/news/story/rat-miner-munna-qureshi-on-uttarkashi-tunnel-rescue-ntc-1828317-2023-11-29