बैतूल को चुनना
मोहन नगर का काम पानी, पर्यावरण, आदिवासी शिक्षा और सामुदायिक संगठन को एक साथ जोड़ता है। उनका आधिकारिक 2026 पद्म परिचय उन्हें मध्य प्रदेश के आदिवासी इलाक़ों में पर्यावरण और शिक्षा का ज़मीनी काम करने वाले व्यक्ति के रूप में दर्ज करता है।
उनका जन्म 23 फ़रवरी 1968 को राजगढ़ ज़िले के रायपुरिया गाँव में हुआ। राजनीति विज्ञान में MA के बाद लगभग 1991 में उन्होंने बैतूल क्षेत्र में आदिवासी कल्याण और शिक्षा का काम शुरू किया।
पहाड़ी से नदी तक
उनके कार्यक्रमों में जागरूकता यात्राएँ, पोषण और सब्ज़ी उगाना, कंटूर खाइयाँ, पौधारोपण और नदियों के जलग्रहण क्षेत्र का काम शामिल रहा। आधिकारिक परिचय 2016–17 के गंगावतरण अभियान, सोनाघाटी पहाड़ियों के उपचार और 2021 में माचना नदी के पुनर्जीवन जैसी पहलों को दर्ज करता है।
लोग ही असली ताक़त
उन्होंने इन परियोजनाओं को श्रमदान और स्थानीय संस्थाओं से जोड़ा। जलग्रहण क्षेत्र को फिर से सँवारना पूरे परिदृश्य की प्रक्रिया है, और समुदाय को संगठित करना इंजीनियरिंग जितना ही अहम हो सकता है।
2026 का पद्म श्री उनके पर्यावरण के काम के साथ-साथ आदिवासी समुदायों से उनके लंबे जुड़ाव की पहचान है।
स्रोत
- PIB / पद्म पुरस्कार 2026: आधिकारिक प्रशस्तियाँ
- पद्म पुरस्कार 2026: आधिकारिक सूची
- DD: सार्वजनिक वीडियो
- static.pib.gov.in/WriteReadData/specificdocs/documents/2026/jun/doc2026623901101.pdf
- padmaawards.gov.in/Document/pdf/notifications/PadmaAwards/PadmaAwards2026.pdf
- youtube.com/watch?v=6m8jdJ1v5y8