दो ज़िंदगियाँ, साथ-साथ
महाबीर नायक झारखंड की नागपुरी लोक परंपरा के गायक, कवि और सांस्कृतिक कार्यकर्ता हैं। उनकी आधिकारिक प्रशस्ति लोक संस्कृति में उनके छह दशक से ज़्यादा के योगदान को दर्ज करती है।
उनका जन्म 24 सितंबर 1942 को रांची के पास उरुगुट्टू गाँव में हुआ। स्कूल के बाद उन्होंने तकनीकी प्रशिक्षण लिया और 1963 में हेवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन से जुड़े, जहाँ 2001 तक काम किया। इन सब वर्षों में उनका सांस्कृतिक जीवन नौकरी के साथ-साथ चलता रहा।
मंच पर, रेडियो पर
1960 के दशक से वे मेलों, जात्रा, सरहुल और मंचों पर नागपुरी गीत गाते रहे। आगे वे कई वर्षों तक रांची के ऑल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन से जुड़े रहे, और सांस्कृतिक संस्थाओं व प्रकाशनों में भी काम किया।
नागपुरी के संरक्षक
आधिकारिक परिचय उनके सैकड़ों पारंपरिक गीतों और कविताओं के प्रकाशन, और नागपुरी भाषा व साहित्य पर काम करने वाले शोधार्थियों की मदद का उल्लेख करता है। 2025 के पद्म श्री ने ऐसे क्षेत्रीय संस्कृति-संरक्षक को राष्ट्रीय पहचान दी जो कभी मुख्यधारा का सितारा नहीं रहा।
क्षेत्रीय संस्कृति को प्रसारण और छपे हुए संग्रहों की ज़रूरत है, और संरक्षण मार्गदर्शन से मज़बूत होता है। लोकप्रियता से ज़्यादा निरंतरता मायने रखती है।
स्रोत
- पद्म पुरस्कार 2025: आधिकारिक प्रशस्तियाँ
- संगीत नाटक अकादमी अमृत पुरस्कार सामग्री (2023)
- द स्टेट्समैन: महाबीर नायक को पद्म श्री
- presidentofindia.gov.in/files/2023-06/padma_2nd_3.pdf
- static.pib.gov.in/WriteReadData/specificdocs/documents/2023/sep/doc2023915252901.pdf
- thestatesman.com/india/mahabir-nayak-of-jharkhand-to-be-honoured-with-padma-shri-for-his-contribution-to-arts-1503390766.html