एक सुरक्षित करियर छोड़ना
लिबिया लोबो सरदेसाई की कहानी उस दौर की है जब गोवा पुर्तगाली शासन के अधीन था और स्वतंत्र राजनीतिक संवाद पर कड़ा नियंत्रण था। उनकी 2025 की पद्म प्रशस्ति उन्हें स्वतंत्रता सेनानी, वकील, समाजसेवी और महिला अधिकार कार्यकर्ता के रूप में दर्ज करती है।
उन्होंने बॉम्बे से अंग्रेज़ी ऑनर्स और LL.B. किया और ऑल इंडिया रेडियो के साथ काम किया, लेकिन गोवा की मुक्ति के संघर्ष में सक्रिय हिस्सा लेने के लिए एक सुरक्षित करियर छोड़ दिया।
वॉयस ऑफ़ फ़्रीडम
1955 से 1961 तक उन्होंने वामन सरदेसाई के साथ भूमिगत रेडियो स्टेशन ‘वॉयस ऑफ़ फ़्रीडम’ चलाया। 19 दिसंबर 1961 को गोवा की मुक्ति की घोषणा से उनकी आवाज़ ऐतिहासिक रूप से जुड़ी है। आधिकारिक प्रशस्ति के अनुसार वह अंतिम प्रसारण भारतीय वायुसेना के विमान से किया गया था।
आज़ादी के बाद निर्माण
मुक्ति के बाद वे गोवा, दमन और दीव की पहली पर्यटन निदेशक बनीं, वकालत की, और एक महिला सहकारी बैंक व शिक्षा की पहलों से जुड़ीं। उनका जीवन बताता है कि आज़ादी के बाद संस्थाएँ बनाना उतना ही ज़रूरी है जितना आज़ादी पाना।
संवाद तानाशाही नियंत्रण के ख़िलाफ़ एक ताक़तवर औज़ार हो सकता है, और एक महिला का सार्वजनिक नेतृत्व कई क्षेत्रों में एक साथ फैल सकता है।
स्रोत
- पद्म पुरस्कार 2025: आधिकारिक प्रशस्ति
- द इंडियन एक्सप्रेस: इतिहास पर विशेष लेख
- BBC: डॉक्यूमेंट्री
- padmaawards.gov.in/Document/pdf/CitationsForTickets/2025/202581.pdf
- indianexpress.com/article/explained/explained-history/libia-lobo-sardesai-padma-shri-goa-liberation-9802249/
- youtube.com/watch?v=VLo-x9zm-78