एक झटका जिसने दिशा बदल दी
देवकी अम्मा की कहानी किसी बड़ी परियोजना से नहीं, एक निजी झटके से शुरू होती है। वे आलप्पुझा ज़िले के किसान परिवार से थीं और धान, तिल, नारियल व सब्ज़ियाँ उगाती थीं। 1980 में एक गंभीर कार दुर्घटना में उनके पैर में चोट लगी और चलना-फिरना सीमित हो गया। खेती रुक गई। लेकिन ठीक होने के दिनों में उन्होंने अपने घर के आसपास की रेतीली ज़मीन पर पौधे लगाने शुरू किए।
कोल्लक्कल तपोवनम
धीरे-धीरे यह छोटा प्रयास ‘कोल्लक्कल तपोवनम’ बन गया, लगभग पाँच एकड़ का घरेलू जंगल। 2026 की पद्म प्रशस्ति और PIB परिचय के अनुसार इसमें 3,000 से ज़्यादा पेड़ हैं, जिनमें देसी, औषधीय और दुर्लभ प्रजातियाँ शामिल हैं। यह सिर्फ़ पौधारोपण नहीं है: यह पक्षियों, तितलियों और दूसरे जीवों का घर बन गया है, और उन पौधों का जीवित भंडार भी जो शायद वरना खो जाते।
चालीस साल का रोपना और बाँटना
चार दशकों से ज़्यादा समय तक उन्होंने पौधे बचाए, नई प्रजातियाँ जोड़ीं और विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और आसपास के घरों को पेड़ लगाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बीज और पौधे भी बाँटे। उनके काम को इंदिरा प्रियदर्शिनी वृक्षमित्र पुरस्कार, नारी शक्ति पुरस्कार और 2026 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया।
उनकी कहानी बताती है कि प्रकृति को फिर से सँवारने के लिए हमेशा किसी बड़ी संस्था या भारी पैसे की ज़रूरत नहीं होती। एक व्यक्ति की साल-दर-साल की लगातार देखभाल भी पूरा परिदृश्य बदल सकती है।
स्रोत
- PIB: पद्म श्री 2026 परिचय
- पद्म पुरस्कार 2026: आधिकारिक सूची
- आकाशवाणी: कोल्लक्कल देवकी अम्मा के काम पर फ़ीचर
- pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2265055&lang=2®=48
- padmaawards.gov.in/Document/pdf/notifications/PadmaAwards/PadmaAwards2026.pdf
- newsonair.gov.in/akashvani-features-padma-shri-recipient-kollakal-devaki-amma-gs-work/