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के. चेल्लम्मल
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कृषि · अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह

नारियल अम्मा का परतों वाला खेत

सिर्फ़ छठी कक्षा तक पढ़ी के. चेल्लम्मल ने दक्षिण अंडमान के अपने नारियल के खेत को ऐसी जगह बना दिया जहाँ किसान सीखने आते हैं और कॉलेज अपने विद्यार्थियों को भेजते हैं।

के. चेल्लम्मलK. Chellammal
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दक्षिण अंडमान में अपने खेत पर के. चेल्लम्मल। फ़ोटो: द न्यू इंडियन एक्सप्रेस

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AI आवाज़ में सुनाई गई
जन्म
6 फ़रवरी 1957
स्थान
दक्षिण अंडमान, अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह
खेत
8 एकड़, जैविक, नारियल-आधारित बहु-फ़सली
सम्मान
पद्म श्री 2024 (कृषि)
8 एकड़का जैविक मॉडल खेत
170+आसपास के किसानों को प्रशिक्षण
200+किसान खेत देखने आए

द्वीप के खेत से मॉडल खेत तक

भारत के राष्ट्रपति की पद्म प्रशस्ति चेल्लम्मल को दक्षिण अंडमान की जैविक किसान बताती है, जिन्होंने अपने 8 एकड़ के खेत को नारियल-आधारित बहु-फ़सली मॉडल में बदला। नारियल के पेड़ों के बीच की जगह ख़ाली छोड़ने के बजाय वे वहाँ मसाले, कंद, फल, सब्ज़ियाँ और फूल उगाती हैं। इससे ज़मीन का इस्तेमाल भी बढ़ता है और कमाई के ज़रिए भी।

जैविक, और उसके पीछे पूरी व्यवस्था

आधिकारिक परिचय में जीवामृत, पंचगव्य, हरी खाद, गोबर की खाद, मधुमक्खी पालन और फ़ेरोमोन-आधारित एकीकृत कीट प्रबंधन (IPM) का उपयोग दर्ज है। उनकी कहानी की यही सबसे मज़बूत सीख है: ‘जैविक’ लेबल से ज़्यादा अहम है मिट्टी को पोषण देने, फ़सलें मिलाकर उगाने और कीटों को सँभालने की पूरी व्यवस्था।

खेत जो कक्षा बन गया

प्रशस्ति के अनुसार उन्होंने आसपास के 170 से ज़्यादा किसानों को प्रशिक्षण दिया है और 200 से ज़्यादा किसान उनका खेत देखने आ चुके हैं। कृषि संस्थान भी अपने विद्यार्थियों को अध्ययन-भ्रमण पर भेजते हैं। उनका खेत निजी रोज़ी-रोटी से आगे बढ़कर सीखने और दिखाने की जगह बन गया है।

उनकी औपचारिक पढ़ाई सिर्फ़ छठी कक्षा तक हुई। फिर भी आज संस्थान अपने विद्यार्थियों को उनके खेत से सीखने भेजते हैं। खेती के जीवंत ज्ञान और औपचारिक कृषि शिक्षा के बीच यही पुल उनकी कहानी का सबसे प्रेरक हिस्सा है।

नारियल अम्मा और कृषि-पर्यटन

2024 का पद्म श्री नारियल विकास बोर्ड और ICAR-CIARI से मिले पहले के सम्मानों के बाद आया। वे कृषि-पर्यटन की संभावनाएँ भी तलाश रही हैं, जो खेती, शिक्षा और द्वीप के पर्यटन को जोड़ता है।

उनका खेत बताता है कि कई फ़सलें साथ उगाने से एक फ़सल पर निर्भरता का जोखिम घटता है, और मॉडल खेत तभी सबसे ज़्यादा मायने रखता है जब उसका ज्ञान दूसरे किसानों तक पहुँचे।

स्रोत