द्वीप के खेत से मॉडल खेत तक
भारत के राष्ट्रपति की पद्म प्रशस्ति चेल्लम्मल को दक्षिण अंडमान की जैविक किसान बताती है, जिन्होंने अपने 8 एकड़ के खेत को नारियल-आधारित बहु-फ़सली मॉडल में बदला। नारियल के पेड़ों के बीच की जगह ख़ाली छोड़ने के बजाय वे वहाँ मसाले, कंद, फल, सब्ज़ियाँ और फूल उगाती हैं। इससे ज़मीन का इस्तेमाल भी बढ़ता है और कमाई के ज़रिए भी।
जैविक, और उसके पीछे पूरी व्यवस्था
आधिकारिक परिचय में जीवामृत, पंचगव्य, हरी खाद, गोबर की खाद, मधुमक्खी पालन और फ़ेरोमोन-आधारित एकीकृत कीट प्रबंधन (IPM) का उपयोग दर्ज है। उनकी कहानी की यही सबसे मज़बूत सीख है: ‘जैविक’ लेबल से ज़्यादा अहम है मिट्टी को पोषण देने, फ़सलें मिलाकर उगाने और कीटों को सँभालने की पूरी व्यवस्था।
खेत जो कक्षा बन गया
प्रशस्ति के अनुसार उन्होंने आसपास के 170 से ज़्यादा किसानों को प्रशिक्षण दिया है और 200 से ज़्यादा किसान उनका खेत देखने आ चुके हैं। कृषि संस्थान भी अपने विद्यार्थियों को अध्ययन-भ्रमण पर भेजते हैं। उनका खेत निजी रोज़ी-रोटी से आगे बढ़कर सीखने और दिखाने की जगह बन गया है।
उनकी औपचारिक पढ़ाई सिर्फ़ छठी कक्षा तक हुई। फिर भी आज संस्थान अपने विद्यार्थियों को उनके खेत से सीखने भेजते हैं। खेती के जीवंत ज्ञान और औपचारिक कृषि शिक्षा के बीच यही पुल उनकी कहानी का सबसे प्रेरक हिस्सा है।
नारियल अम्मा और कृषि-पर्यटन
2024 का पद्म श्री नारियल विकास बोर्ड और ICAR-CIARI से मिले पहले के सम्मानों के बाद आया। वे कृषि-पर्यटन की संभावनाएँ भी तलाश रही हैं, जो खेती, शिक्षा और द्वीप के पर्यटन को जोड़ता है।
उनका खेत बताता है कि कई फ़सलें साथ उगाने से एक फ़सल पर निर्भरता का जोखिम घटता है, और मॉडल खेत तभी सबसे ज़्यादा मायने रखता है जब उसका ज्ञान दूसरे किसानों तक पहुँचे।
स्रोत
- भारत के राष्ट्रपति: पद्म पुरस्कार 2024 प्रशस्तियाँ
- PIB: पद्म पुरस्कार 2024
- द न्यू इंडियन एक्सप्रेस: 'मिलिए अंडमान की नारियल अम्मा से'
- presidentofindia.gov.in/sites/default/files/2024-05/padma_awardees_citation_compressed.pdf
- pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=1999790&lang=2®=48
- newindianexpress.com/nation/2024/Jan/26/meet-andamans-nariyal-amma-chosen-for-padma-shri-for-organic-coconut-farming