स्कूल में टिके रहने के लिए मेहनत
जुमदे योमगम गामलिन की कहानी ग़रीबी, ज़मीनी सरकारी काम और नशे के ख़िलाफ़ समाज सेवा का लंबा सफ़र है। आधिकारिक प्रशस्ति के अनुसार उनका जन्म 1 फ़रवरी 1965 को अक्कर योमगम गाँव में हुआ। पिता की जल्दी मृत्यु हो गई, और कठिन समय में उन्होंने पढ़ाई जारी रखने के लिए दिहाड़ी मज़दूरी की।
मैदान में पैंतीस साल
1980 में वे अरुणाचल प्रदेश सरकार में ग्राम सेविका बनीं। सामुदायिक विकास में लगभग 35 वर्षों की सेवा में वे CDPO के स्तर तक पहुँचीं। उन्होंने महिला स्वयं सहायता समूहों के साथ काम किया और सिलाई, कढ़ाई, चॉक, मोमबत्ती और दूसरी उपयोगी चीज़ें बनाने जैसे रोज़गार के हुनर सिखाए। बाद में अपनी संस्था ‘मदर्स विज़न’ के ज़रिए उन्होंने नशा-मुक्ति और महिला सशक्तिकरण पर ध्यान केंद्रित किया।
उबरने की एक जगह
आधिकारिक और सार्वजनिक परिचय मदर्स विज़न के 30 बिस्तरों वाले, आध्यात्मिकता-आधारित नशा-मुक्ति केंद्र का उल्लेख करते हैं। क्षेत्रीय रिपोर्टों के अनुसार 700 से ज़्यादा लोगों को उबरने में मदद मिली है और 2,000 से ज़्यादा महिलाओं को प्रशिक्षण या आर्थिक सहायता मिली है। उनके नशा-विरोधी अभियानों ने दूरदराज़ समुदायों को भांग और अफ़ीम की खेती के ख़िलाफ़ एकजुट किया।
उनका काम बताता है कि नशे से उबरना सज़ा से ज़्यादा पुनर्वास पर टिका है, और महिलाओं की आर्थिक आज़ादी पूरे समुदाय को मज़बूत बनाती है।
स्रोत
- पद्म पुरस्कार 2025: आधिकारिक प्रशस्ति
- द अरुणाचल टाइम्स: जुमदे योमगम गामलिन को पद्म श्री
- मदर्स विज़न पर DD रिपोर्ट
- विकिमीडिया कॉमन्स: पद्म श्री समारोह फ़ोटो
- presidentofindia.gov.in/files/2023-06/padma_2nd_3.pdf
- archive.arunachaltimes.in/index.php/2025/01/26/jumde-yomgam-gamlin-gets-padma-shri/
- youtube.com/watch?v=phV-cR7b0QI