परंपरा और तकनीक का मेल
डॉ. जोगेश देउरी का काम असम की एरी रेशम परंपरा को आजीविका, तकनीक और प्रोसेसिंग से जोड़ने का उदाहरण है। उनकी आधिकारिक 2026 पद्म प्रशस्ति उन्हें ऐसे विशेषज्ञ के रूप में दर्ज करती है जिन्होंने तीन दशक से ज़्यादा रेशम उत्पादन क्षेत्र में काम किया है।
उन्होंने गुवाहाटी विश्वविद्यालय से M.Sc. किया, बरहामपुर के केंद्रीय रेशम अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान से रेशम उत्पादन में स्नातकोत्तर प्रशिक्षण लिया, और चीन के लियाओनिंग रेशम अनुसंधान संस्थान में कोकून तकनीक का अनुभव हासिल किया।
बोडोलैंड सिल्क पार्क
उनकी प्रमुख उपलब्धियों में कोकराझार के बोडोलैंड सिल्क पार्क से जुड़ी एकीकृत व्यवस्था है, जहाँ कोकून बैंक, कताई, छपाई, बुनाई और प्यूपा प्रोसेसिंग को एक जगह लाने की कोशिश की गई। उन्होंने एरी रेशम को टिकाऊ ग्रामीण आजीविका के रूप में बढ़ावा दिया।
एरी, मूगा और आगे
प्रशस्ति मूगा रेशम के संरक्षण, 2019 से मनाए जा रहे एरी दिवस, कसावा (टैपिओका) को पोषक पौधे के रूप में परखने के काम, और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रेशम उत्पादन में भारत के प्रतिनिधित्व का भी उल्लेख करती है। 2026 के पद्म श्री ने इस पूरे क्षेत्र के काम को राष्ट्रीय पहचान दी।
उन्होंने परंपरा को संग्रहालय में बंद रखने के बजाय उसे आजीविका और आधुनिक प्रोसेसिंग से जोड़ने का रास्ता चुना। घर के पास ही मूल्य जोड़ना अक्सर ग्रामीण आय बढ़ाने की कुंजी होता है।
स्रोत
- PIB / पद्म पुरस्कार 2026: आधिकारिक प्रशस्ति
- PIB: डॉ. जोगेश देउरी परिचय
- इंडिया टुडे NE: साक्षात्कार
- आधिकारिक वीडियो
- static.pib.gov.in/WriteReadData/specificdocs/documents/2026/jun/doc2026623901101.pdf
- pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2218922
- indiatodayne.in/assam/video/from-assam-to-the-nation-eri-silk-pioneer-dr-jogesh-deuri-honoured-with-padma-shri-1336697-2026-01-26
- youtube.com/watch?v=JCBe-QfUgZw