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हेइपोर उनी बांग
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शिक्षा · मेघालय

पहाड़ों में हर बच्चे के लिए बना एक स्कूल

मेघालय के एक दूर-दराज़ कोने में वनस्पति विज्ञान पढ़े एक शिक्षक ने अपना स्कूल बनाया और उसे नक़्शों, प्रयोगों, खासी किताबों और विशेष ज़रूरतों वाले बच्चों के लिए जगह से भर दिया।

हेइपोर उनी बांगHeipor Uni Bang
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डॉ. हेइपोर उनी बांग, प्रधानाचार्य व संस्थापक, के.बी. मेमोरियल सेकेंडरी स्कूल

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भूमिका
संस्थापक व प्रधानाचार्य, के.बी. मेमोरियल सेकेंडरी स्कूल
स्थान
वापुंग, पूर्वी जयंतिया हिल्स, मेघालय
शिक्षा
MSc वनस्पति विज्ञान (NEHU); PhD पर्यावरण प्रबंधन
सम्मान
राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2025
2009जब उन्होंने पढ़ाना शुरू किया
2013जब उन्होंने अपना स्कूल बनाया
3छात्रों के लिए लिखी किताबें
16साल, पहली कक्षा से राष्ट्रीय पुरस्कार तक

वनस्पति विज्ञान से कक्षा तक

हेइपोर उनी बांग ने नॉर्थ-ईस्टर्न हिल यूनिवर्सिटी (NEHU) से वनस्पति विज्ञान में MSc करने के बाद 2009 में पढ़ाना शुरू किया। अपना स्कूल शुरू करने से पहले उन्होंने ख्लीहरियात के लिटिल फ़्लावर सेकेंडरी स्कूल और रिम्बाई प्रेस्बिटेरियन हायर सेकेंडरी स्कूल में पढ़ाया।

वे सीधे स्कूल चलाने नहीं आए। शुरुआती बरस उन्होंने कक्षा में शिक्षक के रूप में बिताए।

2013: अपना स्कूल

2013 में उन्होंने पूर्वी जयंतिया हिल्स के वापुंग में के.बी. मेमोरियल सेकेंडरी स्कूल की स्थापना की। क्षेत्रीय रिपोर्टें इसकी साफ़ वजह बताती हैं: ज़िले के उस हिस्से के परिवार अच्छी अंग्रेज़ी-माध्यम शिक्षा चाहते थे, जो उनकी जेब के भीतर हो।

सार्वजनिक रिकॉर्ड में स्कूल की फ़ीस या ग़रीब परिवारों के बच्चों की संख्या दर्ज नहीं है, इसलिए हम इस पर कोई आँकड़ा नहीं लिखते।

एक अलग तरह की कक्षा

उनके राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के प्रशस्ति-पत्र में ऐसी कक्षा का ज़िक्र है जो किताब और ब्लैकबोर्ड से कहीं आगे जाती है। वे फ़्लो चार्ट, आरेख, नक़्शे, ज्यामिति के उपकरण, प्रयोग परियोजनाएँ, कंप्यूटर और डिजिटल टीवी का इस्तेमाल करते हैं। मक़सद है बच्चों को सिर्फ़ सुनने वाले से ख़ुद सीखने वाला बनाना, आपसी बातचीत बढ़ाना और जीवन के व्यावहारिक कौशल सिखाना।

क्षेत्रीय रिपोर्टें उनके ‘फ़्लिप्ड क्लासरूम’ तरीक़े का भी ज़िक्र करती हैं, जिसमें बच्चे बुनियादी सामग्री पहले ख़ुद देखते हैं और कक्षा का समय चर्चा और सवाल हल करने में लगता है।

हर बच्चा शामिल

विशेष ज़रूरतों वाले बच्चों (CwSN) के साथ उनका काम उनकी पहचान का केंद्र है। आधिकारिक प्रशस्ति-पत्र इसे ‘विशेष रूप से सराहनीय’ कहता है और उनकी समावेशी व नवाचारी शिक्षण पद्धति की तारीफ़ करता है।

पुरस्कार के बाद उन्होंने खुलकर कहा कि विशेष ज़रूरतों वाले बच्चों के लिए ज़्यादा संसाधन और सहयोग चाहिए, और ग्रामीण व आर्थिक रूप से कमज़ोर समुदायों तक अच्छी शिक्षा पहुँचनी चाहिए। सार्वजनिक रिकॉर्ड में यह नहीं है कि उन्होंने ऐसे कितने बच्चों को पढ़ाया, इसलिए हम वह संख्या नहीं लिखते।

खासी और दूसरी किताबें

प्रशस्ति-पत्र के अनुसार वे तीन किताबों के लेखक हैं, साथ में दूसरे प्रकाशन भी हैं। सरकारी और स्थानीय स्रोत बताते हैं कि उन्होंने खासी भाषा में पढ़ाई की सामग्री लिखी और स्कूल की सामान्य-ज्ञान सामग्री को ज़िले और राज्य की जानकारी से लगातार अपडेट रखा।

वे अंग्रेज़ी-माध्यम स्कूल चलाते हैं, लेकिन उन्होंने खासी भाषा और स्थानीय ज्ञान को कक्षा से बाहर नहीं किया। उन्हें आधुनिक शिक्षा का हिस्सा बनाया।

अपने ज़िले पर शोध करने वाले शिक्षक

उन्होंने विलियम कैरी यूनिवर्सिटी, नोंगमेनसोंग से पर्यावरण प्रबंधन में PhD की। उनके शोध का विषय था ‘मेघालय के पूर्वी जयंतिया हिल्स ज़िले में ठोस कचरा प्रबंधन की चुनौतियाँ और अवसर’।

2020 के उनके शोध-पत्र में ज़िले के कचरा स्थलों पर पहुँचने वाले कचरे, जैसे खाने का कचरा, पत्ते, काग़ज़, प्लास्टिक, कपड़ा और धातु, का विश्लेषण किया गया, ताकि कचरा प्रबंधन की बेहतर योजना बन सके। उन्होंने अपने ही ज़िले की असली समस्या चुनी।

स्कूल की दीवारों से बाहर

स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार वे ख्लीहरियात के किशोर न्याय बोर्ड के सदस्य रहे, 2015–16 में रेड क्रॉस सोसाइटी से जुड़े और 2014 से 2017 तक जोवाई के थॉमस जोन्स सिनॉड कॉलेज में पढ़ाया। 2018 के मेघालय गज़ट में उन्हें पूर्वी जयंतिया हिल्स ज़िला चयन समिति का उपाध्यक्ष बताया गया है।

स्कूल ने कक्षा के बाहर भी अच्छा प्रदर्शन किया। उसकी अंडर-14 लड़कों की फ़ुटबॉल टीम 2023 और 2025 में राज्य स्तरीय सुब्रतो मुखर्जी कप में उपविजेता रही। यह कामयाबी खिलाड़ियों, कोचों और शिक्षकों की भी उतनी ही है जितनी प्रधानाचार्य की।

ज़िला, राज्य, देश

उनकी पहचान सीढ़ी-दर-सीढ़ी बनी। 2021 में हाइलैंड पोस्ट ने उन्हें पूर्वी जयंतिया हिल्स के ज़िला पुरस्कार प्राप्त शिक्षक के रूप में दर्ज किया। 2024 में मेघालय सरकार ने उन्हें राज्य पुरस्कार दिया। 5 सितंबर 2025 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नई दिल्ली के विज्ञान भवन में उन्हें और 44 अन्य शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार दिया।

उन्होंने इस पुरस्कार को साझा बताया, अपने परिवार, साथियों और ज़िले व राज्य के शिक्षा विभागों की मेहनत का फल। इस मौक़े पर उन्होंने निजी स्कूलों के ढाँचे और शिक्षकों के वेतन के लिए सहयोग, राष्ट्रीय शिक्षा नीति को पूरी तरह लागू करने, खासी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने और विशेष ज़रूरतों वाले बच्चों के लिए बेहतर संसाधनों की माँग भी रखी।

“यह पुरस्कार सामूहिक प्रयास की पहचान है…”

हेइपोर उनी बांग

यह कहानी क्यों मायने रखती है

दूर-दराज़ इलाक़ा कम उम्मीदों की वजह नहीं होना चाहिए। समावेश का मतलब सिर्फ़ अलग कक्षा बनाना नहीं, बल्कि पढ़ाई को ऐसे गढ़ना है कि हर बच्चा उसमें हिस्सा ले सके। आधुनिक शिक्षा और स्थानीय पहचान साथ-साथ बढ़ सकती हैं। एक शिक्षक अपने समुदाय की असली समस्याओं पर शोध भी कर सकता है।

और एक संस्था बनाकर एक अच्छे शिक्षक का असर कई गुना हो सकता है, एक कक्षा से पूरे स्कूल तक। यह रातोंरात मिली सफलता नहीं है। पहली कक्षा से राष्ट्रीय पुरस्कार तक पहुँचने में सोलह साल लगे।

स्रोत

  • National Teachers' Awards: official citation
  • Ministry of Education / PIB, 2025
  • Meghalaya Gazette, 2018
  • Meghalaya Government IPR release, 2026
  • Highland Post
  • Meghalaya Monitor
  • India Today NE
  • NewsOnAir
  • Journal article: solid waste in East Jaintia Hills (2020)
  • nationalawardstoteachers.education.gov.in/TeacherCitation.aspx