अस्पताल के बिस्तर से जो दिखा
गुरविंदर सिंह का समाज सेवा का सफ़र उनके अपने जीवन के एक दर्दनाक मोड़ से निकला। वे खेती की मशीनें ठीक करने वाले मिस्त्री थे। एक दुर्घटना के बाद लकवा हुआ और वे व्हीलचेयर पर आ गए। अस्पताल में इलाज के दौरान उन्होंने एक संस्था को मरीज़ों को मुफ़्त दूध और ब्रेड देते देखा। वही पल आगे चलकर उनके अपने काम का बीज बना।
एक गिलास दूध से एक ट्रस्ट तक
उन्होंने सिरसा सिविल अस्पताल में मुफ़्त दूध सेवा से शुरुआत की, और 2000 के दशक के मध्य में भाई कन्हैया मानव सेवा ट्रस्ट बनाया। आधिकारिक पद्म प्रशस्ति के अनुसार ट्रस्ट ने रक्तदान शिविर, एंबुलेंस सेवा, बेसहारा लोगों की देखभाल, शिक्षा और पुनर्वास के कई कार्यक्रम खड़े किए। जुलाई 2008 से प्रशस्ति 10,844 से ज़्यादा दुर्घटना पीड़ितों और प्रसव मामलों में एंबुलेंस मदद दर्ज करती है।
एक घर, और घर का रास्ता
भाई कन्हैया आश्रम में बेघर, दिव्यांग और बेसहारा लोगों की देखभाल होती है। प्रशस्ति वहाँ 406 से ज़्यादा लोगों की सेवा और ठीक होने के बाद 380 लोगों के परिवारों से मिलने या घर भेजे जाने को दर्ज करती है। ट्रस्ट का शिक्षा विभाग लगभग 250 बेघर, अनाथ और बेहद ग़रीब बच्चों को मुफ़्त परिवहन, किताबें, स्टेशनरी, वर्दी और भोजन देता है।
उनकी कहानी दिव्यांगता के बाद सिर्फ़ मदद पाने वाला बने रहने की नहीं है। यह दूसरों के लिए सेवा की पूरी व्यवस्था खड़ी करने की कहानी है।
स्रोत
- पद्म पुरस्कार 2024: आधिकारिक प्रशस्ति
- भाई कन्हैया मानव सेवा ट्रस्ट: आधिकारिक वेबसाइट
- द ट्रिब्यून: सिरसा के समाजसेवी को पद्म श्री
- padmaawards.gov.in/Document/pdf/CitationsForTickets/2024/2024113.pdf
- bkmstrust.org/
- tribuneindia.com/news/haryana/padma-shri-conferred-on-sirsa-social-worker-613617/