नुंगन के एक शिक्षक
चरण हेम्ब्रम ने दशकों तक संथाली भाषा, ओल चिकी लिपि और समुदाय से जुड़ी शिक्षा को संस्थागत रूप देने का काम किया। आधिकारिक प्रशस्ति के अनुसार उनका जन्म 9 फ़रवरी 1952 को मयूरभंज के नुंगन गाँव में हुआ। उन्होंने 1971 में मैट्रिक पास किया और 1977 में ASECA(O), रायरंगपुर के ज़रिए शिक्षक प्रशिक्षण लिया।
कक्षा से नेटवर्क तक
उनका काम एक कक्षा से आगे बढ़कर समुदाय की पूरी शिक्षा व्यवस्था तक गया। वे बोर्ड ऑफ़ संथाली एजुकेशन, ओडिशा के सचिव रहे और 1992 से 2004 तक शिक्षा के संगठनात्मक काम से जुड़े रहे। जनजातीय कार्य मंत्रालय के अनुसार उन्होंने 1,500 से ज़्यादा ‘इतुन आसरा’ केंद्र खड़े करने और फैलाने में भूमिका निभाई, जो संथाली सीखने, सांस्कृतिक परंपराओं और जनजातीय युवाओं को सशक्त बनाने से जुड़े हैं।
लिपि क्यों मायने रखती है
ओल चिकी साक्षरता सिर्फ़ अक्षर सीखना नहीं है। यह एक जनजातीय समुदाय को अपनी भाषा में ज्ञान तक पहुँच देती है। उनका सफ़र भाषा, पाठ्यक्रम, संस्थाओं और ज़मीनी केंद्रों को जोड़ता है, और 2026 का पद्म श्री शिक्षा और संस्कृति में उसी लंबे योगदान की पहचान है।
मातृभाषा में शिक्षा सम्मान और पहुँच, दोनों से जुड़ी है, और कोई भाषा तब सबसे अच्छी तरह बचती है जब उसे आगे ले जाने वाली संस्थाएँ हों।
स्रोत
- PIB / पद्म पुरस्कार 2026: आधिकारिक प्रशस्ति
- जनजातीय कार्य मंत्रालय: परिचय वीडियो (2026)
- विकिमीडिया कॉमन्स: चरण हेम्ब्रम (CC0)
- static.pib.gov.in/WriteReadData/specificdocs/documents/2026/jun/doc2026623901101.pdf
- youtube.com/watch?v=0RRPPF4ch4o
- commons.wikimedia.org/wiki/File:Charan_Hembram.jpg