संकट में एक कला
एटिकोप्पाका के खिलौनों का संकट सिर्फ़ इतना नहीं था कि एक पुरानी कला भुलाई जा रही थी। रंग, सुरक्षा, बिक्री और ख़रीदारों की बदलती उम्मीदें, सब एक साथ इस पारंपरिक कला पर दबाव डाल रहे थे। सी. वी. राजू ने इसी खाली जगह में अपना काम खोजा: प्राकृतिक रंग, बेहतर प्रक्रिया और कारीगरों के साथ मिलकर काम।
एटिकोप्पाका के लाख वाले लकड़ी के खिलौने लंबे समय से गाँव की शिल्प परंपरा का हिस्सा रहे हैं। लेकिन सिंथेटिक और सीसे वाले रंगों तथा गिरते बाज़ार ने इस कला का भविष्य ख़तरे में डाल दिया।
जड़ों, छाल और बीजों से रंग
विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के अनुसार राजू ने जड़ों, छाल, पत्तियों, फलों, बीजों और दूसरे पौधों से रंग विकसित करने पर काम किया। उनका योगदान सिर्फ़ ‘प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल’ नहीं था। उन्होंने रंगों की श्रृंखला बढ़ाई, उनकी शेल्फ़-लाइफ़ लंबी की और प्रक्रिया को एकसार बनाया।
राष्ट्रीय नवप्रवर्तन प्रतिष्ठान (NIF) ने रंगों के हर्बल होने की पुष्टि, उत्पाद विकास और बाज़ार तक पहुँचाने में उनकी मदद की। इससे इस कला को नई पहचान मिली: ऐसे खिलौने जो बच्चों के लिए सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल हैं।
नवाचार को रोज़ी-रोटी से जोड़ना
राजू ने पद्मावती एसोसिएट्स नाम की सहकारी संस्था बनाई ताकि रंग और खिलौने बाज़ार तक पहुँचें और कारीगर समुदाय को लगातार काम मिले। इससे यह नवाचार किसी एक व्यक्ति के पेटेंट से नहीं, कारीगरों की पूरी स्थानीय व्यवस्था से जुड़ता है।
सम्मान, और किसे किस बात का श्रेय
उन्हें 2002 में NIF राष्ट्रीय ज़मीनी नवाचार पुरस्कार मिला, 2018 में वे राष्ट्रपति भवन में इनोवेशन स्कॉलर-इन-रेज़िडेंस रहे, और 2023 में कला के लिए पद्म श्री से सम्मानित हुए। 2017 में एटिकोप्पाका खिलौनों को GI पंजीकरण भी मिला, जिसके लिए राज्य के हस्तशिल्प निगम ने आवेदन किया था।
उनकी कहानी क्या सिखाती है
जब बाज़ार का दबाव इस कला को सिंथेटिक शॉर्टकट की ओर धकेल रहा था, तब राजू ने परंपरा छोड़ने के बजाय उस पर वैज्ञानिक प्रयोग करना चुना। विरासत बचाने का मतलब बदलाव रोकना नहीं, ज़िम्मेदारी से ढलना भी हो सकता है। कोई शिल्प तभी टिकता है जब उसके कारीगर की रोज़ी-रोटी भी टिके।
स्रोत
- DST: आंध्र प्रदेश के ज़मीनी नवप्रवर्तक, जो लुप्त होती कला को जीवित कर रहे हैं
- DST: पद्म श्री 2023 पाने वाले ज़मीनी नवप्रवर्तक
- IP India: एटिकोप्पाका खिलौने GI रिकॉर्ड (सं. 482)
- dst.gov.in/grassroots-innovator-andhra-pradesh-reviving-dying-art-making-sustainable-and-children-friendly
- dst.gov.in/grassroots-innovators-conferred-padma-shri-st-based-innovative-ways-reviving-traditional-art-and
- search.ipindia.gov.in/GIRPublicSearch/Application/Details/482