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अन्ना मणि
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विज्ञान और नवाचार · केरल

भारत के मौसम उपकरण बनाने वाली वैज्ञानिक

मौसम का पूर्वानुमान उतना ही अच्छा होता है जितने उसके पीछे के उपकरण। अन्ना मणि ने अपना करियर यह पक्का करने में लगाया कि भारत अपने उपकरण ख़ुद बना सके, जाँच सके और उन पर भरोसा कर सके।

अन्ना मणिAnna Mani
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अन्ना मणि। फ़ोटो: अभिलेखीय चित्र; श्रेय की पुष्टि जारी

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जन्म
23 अगस्त 1918, पीरमेड, केरल
निधन
2001
क्षेत्र
मौसम विज्ञान, उपकरण
संस्थान
भारत मौसम विज्ञान विभाग; रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट
सम्मान
INSA के. आर. रामनाथन पदक 1987
1918पीरमेड, केरल में जन्म
1987INSA के. आर. रामनाथन पदक

क्रिस्टल से मौसम तक

अन्ना मणि का जन्म 23 अगस्त 1918 को केरल के पीरमेड में हुआ। बचपन से उन्हें पढ़ने और विज्ञान में रुचि थी, और उन्होंने प्रेसीडेंसी कॉलेज, मद्रास से भौतिकी और रसायन पढ़ा।

उनका शुरुआती शोध सी. वी. रमन की प्रयोगशाला के माहौल में क्रिस्टल पर था। फिर उन्होंने दिशा बदली, उन उपकरणों की ओर जो मौसम को मापते हैं।

भरोसेमंद देसी उपकरण

लंदन में प्रशिक्षण के बाद वे भारत मौसम विज्ञान विभाग से जुड़ीं। वहाँ उन्होंने देश में मौसम उपकरणों के डिज़ाइन, अंशांकन और मानकीकरण की अपनी क्षमता बनाने में अहम भूमिका निभाई।

उन्होंने सौर विकिरण, ओज़ोन और पवन-ऊर्जा संसाधनों के आकलन पर भी काम किया और उप महानिदेशक के पद तक पहुँचीं। भरोसेमंद उपकरणों के बिना मौसम विज्ञान संभव नहीं, और उन्होंने इसी बुनियादी ढाँचे को मज़बूत किया।

चुपचाप खड़ी रीढ़

उनके माप-मानक और आँकड़े मौसम पूर्वानुमान, सौर-ऊर्जा अध्ययन और पवन-ऊर्जा योजना के लिए लंबे समय तक राष्ट्रीय महत्व के रहे। सेवानिवृत्ति के बाद भी वे शोध और उपकरणों से जुड़ी रहीं।

उनका जीवन याद दिलाता है कि अंशांकन, मानक और सावधान माप विज्ञान की रीढ़ हैं। हर बड़ा योगदान सुर्ख़ियाँ बटोरने वाली खोज नहीं होता।

स्रोत