लॉग इन
EN हिंदी
अब्दुल खादर नदाकट्टिन
← सभी नायक
विज्ञान और नवाचार · कर्नाटक

धारवाड़ का 'इमली दीवाना'

इंजीनियरिंग की डिग्री के बिना अब्दुल खादर नदाकट्टिन ने पूरी ज़िंदगी खेती की छोटी-छोटी ज़िद्दी परेशानियों को ऐसी मशीनों में बदला है जिन्हें छोटे किसान ख़रीद सकें।

अब्दुल खादर नदाकट्टिनAbdul Khader Nadakattin
WhatsApp X Facebook

2022 में पद्म श्री ग्रहण करते अब्दुल खादर नदाकट्टिन। फ़ोटो: ANI

यह कहानी सुनें0:00 / 2:60
AI आवाज़ में सुनाई गई
स्थान
अन्निगेरी, नवलगुंद तालुका, धारवाड़
राज्य
कर्नाटक
पहचान
छोटे किसानों के लिए खेती की मशीनें
सम्मान
NIF लाइफ़टाइम अचीवमेंट 2015; पद्म श्री 2022
2015NIF लाइफ़टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड
2022ज़मीनी नवाचार के लिए पद्म श्री
6+मशीनें जो DST के रिकॉर्ड में दर्ज हैं

मशीनों को समझने की आदत

अब्दुल खादर नदाकट्टिन की कहानी इस सोच को चुनौती देती है कि इंजीनियरिंग सिर्फ़ प्रयोगशाला या डिग्री से आती है। धारवाड़ के इस किसान ने खेती में रोज़ दिखने वाली समस्याओं, जैसे इमली की प्रोसेसिंग, बुआई, गहरी जुताई और गन्ने की रोपाई, को मशीनों और कम लागत वाले उपकरणों में बदला।

राष्ट्रीय नवप्रवर्तन प्रतिष्ठान (NIF) के रिकॉर्ड उन्हें धारवाड़ के नवलगुंद तालुका के अन्निगेरी से जोड़ते हैं। परिवार खेती करता था। संस्थागत परिचयों के अनुसार उनकी ताक़त औपचारिक प्रशिक्षण नहीं, खेत पर बारीक नज़र और मशीनों के प्रति जिज्ञासा थी। उनका पहला चर्चित आविष्कार छोटा-सा था: पानी वाला अलार्म, जो तय समय पर उन पर पानी गिराकर उन्हें जगा देता था।

उन्हें ‘इमली दीवाना’ क्यों कहा गया

विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के अनुसार उन्होंने क्षारीय, कम पानी वाली ज़मीन पर इमली उगाने से शुरुआत की। फिर इस फ़सल की हर व्यावहारिक समस्या पर प्रयोग करते गए: तुड़ाई, बीज अलग करना, कटाई। आसपास के लोग उन्हें ‘हुनसे हुच्चा’ यानी इमली का दीवाना कहने लगे। इमली के बीज अलग करने की उनकी मशीन उनके सबसे जाने-माने आविष्कारों में से एक बनी।

एक के बाद एक समस्या

उनकी सूची किसी एक मशीन पर नहीं रुकती। DST के आधिकारिक परिचय में हल के ब्लेड बनाने की मशीन, बीज-सह-खाद ड्रिल, पानी गरम करने का बॉयलर, स्वचालित गन्ना बुआई ड्रिलर और व्हील टिलर दर्ज हैं। इन सबके पीछे एक ही सोच है: कम लागत, टिकाऊपन, और छोटे व सीमांत किसानों के लिए आसान इस्तेमाल।

NIF से पद्म श्री तक

2015 में राष्ट्रीय नवप्रवर्तन प्रतिष्ठान ने उन्हें लाइफ़टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड दिया, जो राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने प्रदान किया। 2022 में उन्हें पद्म श्री मिला। DST परिचय बताता है कि वे बिना जूते-चप्पल के चलते हैं, इसलिए कुछ लोग उन्हें ‘नंगे पाँव वाला वैज्ञानिक’ कहते हैं। लेकिन इस उपनाम से ज़्यादा अहम समस्याएँ सुलझाने का उनका रिकॉर्ड है।

उनकी कहानी क्या सिखाती है

नवाचार की शुरुआत किसी बड़ी समस्या से ही हो, यह ज़रूरी नहीं। जिस आदत ने पानी वाला अलार्म बनाया, उसी ने आगे खेती की मशीनें बनाईं। बारीक अवलोकन और बार-बार के प्रयोग से बिना डिग्री के भी असली नवाचार हो सकता है। और खेती की मशीन तभी काम की है जब वह किसान की जेब और ज़रूरत, दोनों के हिसाब से हो।

स्रोत